गणेश चतुर्थी 2026 आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। जानें गणपति स्थापना का ढाई घंटे का विशेष मुहूर्त, राहुकाल का समय और विसर्जन की महत्वपूर्ण तिथियां।

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  • गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक।
  • राहुकाल का समय: सुबह 7:41 बजे से 9:13 बजे तक (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित)।
  • चंद्र दर्शन निषेध: सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक।
  • विसर्जन तिथि: 25 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी)।

गणेश चतुर्थी 2026 के पावन अवसर पर आज देशभर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। 14 सितंबर 2026, सोमवार को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव का भव्य शुभारंभ हो रहा है। श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में 'विघ्नहर्ता' की प्रतिमा स्थापित कर उनकी आराधना करेंगे।

गणपति स्थापना का विशेष मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर स्थापना के लिए दोपहर का समय अत्यंत फलदायी है। भक्तों के लिए गणपति स्थापना का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। यह लगभग ढाई घंटे का समय है जिसमें विधि-विधान से बप्पा का आह्वान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that timing in Vedic astrology plays a crucial role in the spiritual efficacy of rituals. Performing 'Sthapana' during the 'Madhyahna Kaal' is believed to align the devotee's energy with the cosmic vibrations of Lord Ganesha, ensuring the removal of obstacles and the arrival of prosperity.

गणेश चतुर्थी पर सही मुहूर्त में की गई पूजा न केवल सुख-समृद्धि लाती है, बल्कि जीवन के सभी विघ्नों को समूल नष्ट कर देती है।

राहुकाल और चंद्र दर्शन का ध्यान रखें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज सुबह 7:41 से 9:13 बजे तक राहुकाल रहेगा, इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। साथ ही, आज चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित है; सुबह 9:06 बजे से लेकर रात 8:04 बजे तक चंद्र दर्शन न करने की सलाह दी जाती है ताकि 'मिथ्या दोष' से बचा जा सके।

पूजा विधि और महत्वपूर्ण नियम

स्थापना से पूर्व पूजा स्थल की शुद्धि अनिवार्य है। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें जल, पंचामृत, रोली, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इनका भोग लगाना न भूलें। ध्यान रहे, गणेश पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित है।

गणपति विसर्जन की तिथि

गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ बप्पा को विदाई देंगे और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना करेंगे।

Did You Know?: भगवान गणेश को दूर्वा (घास) की 21 गांठें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह उनकी शांति और शक्ति का प्रतीक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: गणेश चतुर्थी 2026 पर स्थापना का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर: सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है।

प्रश्न 2: क्या गणेश पूजा में तुलसी का उपयोग कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है।