भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए IN-SPACe ने अंतरिक्ष वस्तुओं के नियोजित पुन: प्रवेश (re-entry) के लिए पहली बार सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी सैटेलाइट या रॉकेट के पृथ्वी पर लौटने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

मुख्य बातें

  • अंतरिक्ष वस्तुओं के नियोजित पुन: प्रवेश के लिए अब IN-SPACe से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
  • सुरक्षा मानक: पुन: प्रवेश से होने वाले हताहतों का जोखिम 10,000 में से 1 से कम होना चाहिए।
  • विदेशी संस्थाओं को भारतीय संस्थाओं के माध्यम से आवेदन करना होगा।
  • तीसरे पक्ष को होने वाले नुकसान के लिए कंपनियों को बीमा लेना अनिवार्य होगा।

भारत ने अपने बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रमों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने अंतरिक्ष वस्तुओं के नियोजित पुन: प्रवेश (Planned Re-entry) के लिए व्यापक दिशानिर्देशों का अनावरण किया है। यह कदम भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इन नए नियमों के तहत, कोई भी भारतीय संस्था, चाहे वह भारत के भीतर हो या बाहर, यदि अपने सैटेलाइट, रॉकेट स्टेज या अन्य अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाने की योजना बनाती है, तो उसे IN-SPACe से पूर्व अनुमति लेनी होगी। यह नियम विशेष रूप से उन मिशनों पर लागू होता है जहाँ पुन: प्रवेश को जानबूझकर नियोजित किया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (जैसे Skyroot Aerospace) विकसित हो रहा है, अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ये दिशानिर्देश न केवल दुर्घटनाओं को रोकेंगे, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष मानकों के साथ भारत के सामंजस्य को भी मजबूत करेंगे।

अंतरिक्ष सुरक्षा के ये नए मानक भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक जिम्मेदार खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेंगे।

दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अंतरिक्ष यान मिशन के बाद स्वाभाविक रूप से वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाता है और न्यूनतम मलबा छोड़ता है, तो उसे अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, ऐसी योजनाओं को 'स्पेस डेब्रिस मिटिगेशन रणनीति' का हिस्सा होना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने हाल ही में अपने निजी अंतरिक्ष युग की शुरुआत की है, जिसमें Skyroot Aerospace का विक्रम-1 रॉकेट एक प्रमुख उदाहरण है। जैसे-जैसे पुनः प्रयोज्य लॉन्च वाहन (Reusable Launch Vehicles) और निजी उपग्रहों की संख्या बढ़ेगी, अंतरिक्ष मलबे का सुरक्षित निपटान अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाएगा।

क्या आप जानते हैं?: अंतरिक्ष मलबे को नियंत्रित करना इसलिए जरूरी है क्योंकि एक छोटा सा टुकड़ा भी अंतरिक्ष में चल रहे करोड़ों के उपग्रह को नष्ट कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या सभी अंतरिक्ष यानों को अनुमति की आवश्यकता है?
नहीं, केवल उन यानों को जिन्हें जानबूझकर (planned re-entry) वापस लाया जा रहा है। स्वाभाविक रूप से नष्ट होने वाले यानों को छूट है।

2. यदि पुन: प्रवेश के दौरान नुकसान होता है तो कौन जिम्मेदार है?
संबंधित कंपनी या संस्था पूरी तरह से जिम्मेदार होगी और उसे अनिवार्य तीसरे पक्ष का बीमा रखना होगा।