जीवाश्म प्रवाल (corals) पर आधारित एक नए अध्ययन से पता चला है कि आधुनिक एल नीनो घटनाएं पिछले एक सहस्राब्दी की तुलना में अधिक तीव्र हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को दर्शाती हैं।
- आधुनिक एल नीनो घटनाएं पिछले 1,000 वर्षों में सबसे तीव्र रही हैं।
- शोधकर्ताओं ने प्राचीन समुद्री तापमान को समझने के लिए गैलापागोस के जीवाश्म प्रवाल का उपयोग किया।
- ग्लोबल वार्मिंग प्राकृतिक ENSO चक्र की तीव्रता को बढ़ा रही है।
एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) पृथ्वी पर वर्ष-दर-वर्ष जलवायु भिन्नता का सबसे बड़ा स्रोत है। यह जटिल प्रणाली, जिसमें गर्म चरण (एल नीनो) और ठंडा चरण (ला नीना) शामिल हैं, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न को बदल देती है, ऑस्ट्रेलिया में सूखा लाती है और पेरू के कुछ हिस्सों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनती है।
दशकों से यह सवाल बना हुआ था कि क्या ग्लोबल वार्मिंग इन प्राकृतिक चक्रों को और अधिक शक्तिशाली बना रही है। 20वीं सदी के अंत और 21वीं सदी की शुरुआत में कई शक्तिशाली एल नीनो घटनाएं देखी गईं, लेकिन मौजूदा डेटा इतना सीमित था कि यह तय करना मुश्किल था कि ये केवल संयोग थे या किसी बड़े बदलाव का हिस्सा।
जीवाश्म प्रवाल (Corals) की भूमिका
इस डेटा की कमी को दूर करने के लिए, मिशिगन विश्वविद्यालय की पर्यावरण वैज्ञानिक जूली कोल और उनकी टीम ने प्रकृति के पुराने अभिलेखों का सहारा लिया। गैलापागोस द्वीपों के जीवाश्म प्रवाल का विश्लेषण करके, शोधकर्ताओं ने एक हजार साल पुराने समुद्र की सतह के तापमान का रिकॉर्ड तैयार किया। प्रवाल जैविक रिकॉर्डर के रूप में कार्य करते हैं, जो अपने विकास के समय के पानी के तापमान के रासायनिक संकेतों को संजोकर रखते हैं।
"हमने 20वीं सदी के अंत और 21वीं सदी की शुरुआत में कुछ बहुत शक्तिशाली एल नीनो घटनाएं देखी हैं, और हमें यह नहीं पता था कि वे कितनी असामान्य हैं।"
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एल नीनो का यह प्रवर्धन केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए एक प्रणालीगत खतरा है। जब ENSO चक्र की तीव्रता ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ते तापमान के साथ मिलती है, तो इसके परिणामस्वरूप लू (heatwaves) और सुपर-स्टॉर्म जैसी चरम घटनाएं अधिक घातक और अप्रत्याशित हो जाती हैं।
हमारे वायुमंडल और महासागरों में फंसी अतिरिक्त ऊर्जा इन घटनाओं के लिए ईंधन का काम करती है। जैसे-जैसे महासागर अधिक गर्मी सोखते हैं, प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच तापमान का अंतर अधिक नाटकीय हो जाता है, जिससे हाल के वर्षों में 'सुपर एल नीनो' देखे गए हैं।
| विशेषता | प्राकृतिक ENSO चक्र | जलवायु-प्रवर्धित ENSO |
|---|---|---|
| आवृत्ति | आवधिक/चक्रीय | संभावित रूप से अधिक अनियमित |
| तीव्रता | मध्यम से उच्च | अभूतपूर्व/चरम |
| वैश्विक प्रभाव | क्षेत्रीय मौसम परिवर्तन | प्रणालीगत वैश्विक जलवायु व्यवधान |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग में क्या अंतर है?
एल नीनो एक प्राकृतिक अल्पकालिक जलवायु पैटर्न है, जबकि ग्लोबल वार्मिंग ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि है।
प्रश्न 2: इस शोध के लिए जीवाश्म प्रवाल का उपयोग क्यों किया गया?
चूंकि आधुनिक थर्मामीटर का रिकॉर्ड 1,000 साल पुराना नहीं है, इसलिए प्रवाल प्राचीन समुद्री तापमान का अनुमान लगाने के लिए एक रासायनिक माध्यम प्रदान करते हैं।