वन्यजीव स्वास्थ्य और संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले डॉ. गोविंदस्वामी उमापति को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के फेलो के रूप में चुना गया है। उन्होंने गैर-आक्रामक हार्मोन निगरानी तकनीकों के माध्यम से संरक्षण विज्ञान को नई दिशा दी है।

  • डॉ. गोविंदस्वामी उमापति को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (FNA) का फेलो चुना गया।
  • उन्होंने 30 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों के लिए गैर-आक्रामक हार्मोन निगरानी तकनीक विकसित की।
  • उनके शोध ने मानव-जनित तनाव का वन्यजीवों के प्रजनन और अस्तित्व पर प्रभाव स्पष्ट किया।

हैदराबाद स्थित CSIR-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. गोविंदस्वामी उमापति को नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के फेलो (FNA) के रूप में चुना गया है। यह सम्मान उनके द्वारा वन्यजीव संरक्षण और फिजियोलॉजी के क्षेत्र में किए गए दशकों के कठिन परिश्रम और नवाचार का परिणाम है।

डॉ. उमापति को भारत में 'कंजर्वेशन फिजियोलॉजी' का अग्रणी माना जाता है। उन्होंने ऐसी गैर-आक्रामक (non-invasive) हार्मोन-निगरानी तकनीकों का विकास किया, जिन्होंने वन्यजीवों के स्वास्थ्य की जांच को सरल और सटीक बना दिया है। उनकी इन तकनीकों का परीक्षण मेंढकों और रेड पांडा से लेकर बाघों और हाथियों तक, कुल 30 विभिन्न प्रजातियों पर सफलतापूर्वक किया गया है, जिससे जानवरों को बिना परेशान किए उनके स्वास्थ्य का आकलन करना संभव हुआ है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि डॉ. उमापति का कार्य केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से जीवन रक्षक है। उनके शोध ने यह साबित किया कि मानवीय हस्तक्षेप (Anthropogenic disturbances) कैसे लुप्तप्राय पशु आबादी में ग्लूकोकोर्टिकोइड-मध्यस्थ शारीरिक तनाव पैदा करते हैं। यह तनाव सीधे तौर पर जानवरों की उत्तरजीविता और उनकी प्रजनन सफलता को प्रभावित करता है। इस खोज ने भारत में वन्यजीव प्रबंधन रणनीतियों को पूरी तरह से बदलने में मदद की है और वन्यजीव एंडोक्रिनोलॉजी को संरक्षण विज्ञान के एक अनिवार्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।

वन्यजीवों के हार्मोनल प्रोफाइल को समझना उनके अस्तित्व की लड़ाई को समझने जैसा है, जो संरक्षण नीतियों को डेटा-आधारित बनाता है।

डॉ. उमापति की उपलब्धियां केवल INSA तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले उन्हें नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (FNASc), तेलंगाना एकेडमी ऑफ साइंसेज (FTASc), और सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्शन एंड एंडोक्रिनोलॉजी, इंडिया (FRE) के फेलो के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका यह सफर विज्ञान के प्रति उनके समर्पण और प्रकृति के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में वन्यजीव संरक्षण अक्सर केवल आवास प्रबंधन तक सीमित था, लेकिन डॉ. उमापति जैसे वैज्ञानिकों ने इसे आणविक और हार्मोनल स्तर पर ले जाकर एक नई वैज्ञानिक क्रांति की शुरुआत की है।

क्या आप जानते हैं?: गैर-आक्रामक निगरानी का अर्थ है कि जानवरों के रक्त के नमूने लेने के लिए उन्हें पकड़ने या बेहोश करने के बजाय उनके मल या मूत्र के नमूनों से हार्मोन का विश्लेषण करना।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डॉ. उमापति के शोध का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: उनके शोध ने वन्यजीवों को बिना तनाव दिए उनके स्वास्थ्य और हार्मोनल स्तर की निगरानी करना संभव बनाया है, जिससे उनके संरक्षण की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

प्रश्न 2: INSA फेलो चुने जाने का क्या महत्व है?
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का फेलो बनना भारत में वैज्ञानिक उत्कृष्टता का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।