इसरो के ओशनसैट-3 (Oceansat-3) सैटेलाइट के आंकड़ों से पता चला है कि अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर में समुद्री उत्पादकता और क्लोरोफिल-ए के स्तर में भारी गिरावट आई है। गर्म होते महासागरों के कारण समुद्री खाद्य श्रृंखला पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह स्थिति 2027 की शुरुआत तक बनी रह सकती है।

  • इसरो के ओशनसैट-3 सैटेलाइट ने भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में क्लोरोफिल-ए और समुद्री उत्पादकता में भारी गिरावट दर्ज की है।
  • यह गिरावट अल नीनो के विकास से जुड़ी है, जो समुद्र के तापमान को बढ़ाता है और पोषक तत्वों से भरपूर पानी को ऊपर आने से रोकता है।
  • वैश्विक मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यह "अत्यधिक मजबूत" अल नीनो फरवरी 2027 तक जारी रह सकता है।

इससे पहले कि वर्तमान अल नीनो (El Niño) पूरी तरह से सक्रिय हो, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के उन्नत सैटेलाइट ओशनसैट-3 (Oceansat-3) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री उत्पादकता में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा संबंध महासागरों के बढ़ते तापमान से है।

साल 2022 में लॉन्च किया गया इसरो का ओशनसैट-3 (जिसे अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम EOS-06 भी कहा जाता है) वैश्विक स्तर पर वायुमंडल और महासागरों के जैविक और भौतिक मानकों की निगरानी के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें ओशन कलर मॉनिटर-3 (OCM-3) और स्कैटरोमीटर जैसे अत्याधुनिक सेंसर लगे हैं, जो समुद्री पौधों में पाए जाने वाले क्लोरोफिल-ए (हरे रंग का पिगमेंट) की मैपिंग करते हैं।

हैदराबाद स्थित इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने अप्रैल, मई और जून के महीनों के लिए 2023 से 2026 तक प्रशांत महासागर में क्लोरोफिल-ए के स्तर का विश्लेषण किया। जहां 2024 और 2025 में स्थितियां सामान्य थीं, वहीं जून 2026 के आंकड़ों ने अल नीनो के प्रभाव के कारण क्लोरोफिल-ए में भारी कमी दिखाई। इस दौरान समुद्री हवाओं का रुख भी बदल गया, जो अल नीनो के आने का स्पष्ट संकेत है।

Why This Matters

बोझोकमीडिया (BozokMedia) के विश्लेषण से पता चलता है कि समुद्री उत्पादकता, विशेष रूप से फाइटोप्लांकटन (समुद्री सूक्ष्म पौधे) में कमी, पूरी वैश्विक समुद्री खाद्य श्रृंखला को हिलाकर रख सकती है। फाइटोप्लांकटन महासागर के प्राथमिक उत्पादक हैं, जो छोटी मछलियों से लेकर विशाल व्हेल तक का पेट भरते हैं। क्लोरोफिल-ए में लगातार गिरावट से मछलियों की आबादी में भारी कमी आ सकती है, जिससे वैश्विक मत्स्य पालन उद्योग और तटीय अर्थव्यवस्थाएं तबाह हो सकती हैं।

"अल नीनो के दौरान गर्म पानी की परत के कारण नीचे से पोषक तत्वों से भरपूर ठंडा पानी ऊपर नहीं आ पाता, जिससे फाइटोप्लांकटन का विकास रुक जाता है और समुद्री उत्पादकता घट जाती है," NRSC के एक विशेषज्ञ ने बताया।
मानक (Parameter)सामान्य स्थिति (2024–2025)अल नीनो की स्थिति (2026)
समुद्र की सतह का तापमानसामान्य / औसतअसामान्य रूप से गर्म
समुद्री हवाएं (Winds)पूर्वी हवाएं (व्यापारिक पवनें)कमजोर या पश्चिमी हवाओं में बदलाव
पोषक तत्वों का ऊपर आना (Upwelling)मजबूत, पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आता हैअवरुद्ध, पोषक तत्वों की कमी वाला पानी
क्लोरोफिल-ए का स्तरस्थिर और उच्च उत्पादकतातेजी से गिरावट और सीमित क्षेत्र

वैश्विक मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस साल सितंबर से नवंबर के दौरान एक 'बेहद मजबूत' अल नीनो उभर सकता है, जो फरवरी 2027 तक बना रहेगा। इसके कारण आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर में कम क्लोरोफिल वाला क्षेत्र और अधिक फैल सकता है, जो समुद्री पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।

क्या आप जानते हैं?: पृथ्वी पर मौजूद कुल ऑक्सीजन का लगभग 50% हिस्सा महासागरों में मौजूद फाइटोप्लांकटन द्वारा ही पैदा किया जाता है। इसलिए समुद्री उत्पादकता में गिरावट सीधे वैश्विक ऑक्सीजन चक्र को प्रभावित कर सकती है!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: अल नीनो क्या है और यह समुद्री जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर 1: अल नीनो प्रशांत महासागर के पानी का असामान्य रूप से गर्म होना है। यह गर्म पानी पोषक तत्वों से भरपूर ठंडे पानी को ऊपर आने से रोकता है, जिससे समुद्री जीवों और पौधों (फाइटोप्लांकटन) को भोजन नहीं मिल पाता।

प्रश्न 2: इसरो का ओशनसैट-3 सैटेलाइट महासागरों की निगरानी कैसे करता है?
उत्तर 2: ओशनसैट-3 अपने ओशन कलर मॉनिटर-3 (OCM-3) सेंसर की मदद से अंतरिक्ष से समुद्र के पानी में क्लोरोफिल-ए (हरे रंग के पिगमेंट) के स्तर को मापता है, जिससे समुद्री उत्पादकता का पता चलता है।