चेन्नई में आयोजित द हिंदू-वीआईटी बायोटेक कॉन्क्लेव में शीर्ष वैज्ञानिकों ने पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम कर स्वदेशी अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देने पर चर्चा की।

  • भारत अब पश्चिमी टीकों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी अनुसंधान और विनिर्माण की ओर बढ़ रहा है।
  • 2026 कॉन्क्लेव में प्रिसिजन मेडिसिन, जीन एडिटिंग और 'वन हेल्थ' रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • भारत बायोटेक ने भारतीय कंपनियों को अन्य विकासशील देशों के लिए संक्रामक रोगों के उत्पाद विकसित करने का सुझाव दिया।

चेन्नई के ताज कॉनेमारा में शुक्रवार, 11 सितंबर, 2026 को द हिंदू-वीआईटी बायोटेक कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन हुआ। द हिंदू के सहयोग से वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘विज्ञान में नए क्षितिजों की खोज’ (Exploring New Frontiers in Science) था, जिसका उद्देश्य बायोमेडिकल अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के बीच की दूरी को कम करना है।

उद्घाटन सत्र में एन. राम (निदेशक, द हिंदू ग्रुप), एल.वी. नवनीत (सीईओ, द हिंदू) और जी. विस्वानाथन (संस्थापक और चांसलर, वीआईटी) जैसे दिग्गजों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि के रूप में भारत बायोटेक की सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक तथा सीआईआई (CII) की नामित अध्यक्ष सुचित्रा एल्ला ने भारत के फार्मास्युटिकल परिदृश्य में आ रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

वैज्ञानिक संप्रभुता की ओर कदम

अपने संबोधन में सुचित्रा एल्ला ने रेखांकित किया कि भारत अब केवल पश्चिम द्वारा विकसित अणुओं और टीकों पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अब अपनी स्वयं की अनुसंधान और विनिर्माण क्षमताएं विकसित कर रहा है। डॉ. एल्ला के अनुसार, भारतीय कंपनियों को केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्य विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से संक्रामक रोगों के समाधान खोजने चाहिए।

"भारतीय कंपनियों को घरेलू बाजार से आगे देखना चाहिए और अन्य विकासशील देशों के लिए उत्पाद विकसित करने चाहिए, विशेष रूप से संक्रामक रोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"

उन्होंने 'वन हेल्थ' (One Health) दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच अंतर्संबंधों को पहचानता है, और जीवन विज्ञान तथा खाद्य सुरक्षा के बीच संबंधों को मजबूत करने की वकालत की।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कॉन्क्लेव केवल एक शैक्षणिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के स्वास्थ्य बाजार में भारत के प्रभुत्व जमाने की रणनीतिक मंशा को दर्शाता है। डॉ. जी. विस्वानाथन द्वारा प्रिसिजन मेडिसिन और जीन एडिटिंग पर दिए गए जोर से यह स्पष्ट है कि भारत व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा (Personalized Healthcare) की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

कार्यक्रम में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। वीआईटी के उपाध्यक्ष जी.वी. सेल्वम ने दवा खोज (Drug Discovery) में नवाचार के अवसरों पर चर्चा की, ताकि भविष्य के वैज्ञानिक बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की जटिलताओं को संभालने में सक्षम हों।

युगदृष्टिकोणमुख्य लक्ष्य
पारंपरिक युगपश्चिमी आयात/लाइसेंसिंगघरेलू उपलब्धता
आधुनिक युग (2026)स्वदेशी आरएंडडी (R&D)वैश्विक नेतृत्व और संप्रभुता
क्या आप जानते हैं?: 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को अब WHO और FAO द्वारा भविष्य की महामारियों को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बायोटेक कॉन्क्लेव 2026 का मुख्य विषय क्या था?
मुख्य विषय ‘विज्ञान में नए क्षितिजों की खोज’ था, जिसमें ड्रग डिस्कवरी और प्रिसिजन मेडिसिन पर ध्यान दिया गया।

सुचित्रा एल्ला द्वारा उल्लेखित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण क्या है?
यह एक समग्र दृष्टिकोण है जो संक्रामक रोगों से लड़ने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एकीकृत करता है।