वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र में 'गेगेनोफिस चंदगडी' नामक पैर रहित उभयचर (Caecilian) की एक नई प्रजाति की खोज की है, जो जैव विविधता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
- महाराष्ट्र के कोल्हापुर (चंदगड) क्षेत्र में पैर रहित उभयचर 'Gegeneophis chandgadi' की खोज।
- यह खोज भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।
- यह प्रजाति संरक्षित वनों के बाहर आवासीय और कृषि क्षेत्रों में भी पाई गई है।
महाराष्ट्र के उत्तरी पश्चिमी घाटों के कोल्हापुर क्षेत्र (चंदगड) में शोधकर्ताओं की एक बहु-संस्थान टीम ने एक नए भूमिगत, पैर रहित उभयचर की खोज की है। इस नई प्रजाति को Gegeneophis chandgadi नाम दिया गया है। यह खोज भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), डब्ल्यूआरसी पुणे, यशवंतराव चव्हाण महाविद्यालय (हल्कर्णी), सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय और म्हादेई अनुसंधान केंद्र (गोवा) के वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयास से संभव हुई है।
इस खोज का विवरण एक विस्तृत शोध पत्र में प्रकाशित किया गया है, जिसका शीर्षक 'Exploring cryptic diversity in Gegeneophis Peters' है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह जीव अपनी शारीरिक संरचना और आणविक डेटा के आधार पर अब तक ज्ञात किसी भी प्रजाति से अलग है। इस टीम में साहिल शिकलगर, राहुल एन. पाटिल और के. पी. दिनेश जैसे प्रमुख वैज्ञानिक शामिल थे।
यह खोज महत्वपूर्ण क्यों है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि Gegeneophis chandgadi का खोजा जाना इस बात का प्रमाण है कि महत्वपूर्ण भूमिगत जैव विविधता केवल संरक्षित वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। यह प्रजाति बुजावडे, चंदगड के मानव-निवासित और कृषि परिदृश्यों में पाई गई, जो यह दर्शाता है कि शहरीकरण के बीच भी प्रकृति के अनछुए हिस्से जीवित हैं।
"यह प्रजाति स्थानीय चंदगडी बोली के नाम पर रखी गई है, जो इस क्षेत्र की भाषाई पहचान और स्थानीय लोगों के पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान के प्रति सम्मान प्रकट करती है।"
इस जीव की पहचान करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था क्योंकि यह दिखने में केंचुओं या अंधे सांपों जैसा लगता है। वैज्ञानिकों ने इसे अलग पहचान देने के लिए विस्तृत रूपात्मक (morphological) और मेरिस्टिक विश्लेषण के साथ आणविक डेटा का उपयोग किया।
भारत में उभयचरों की विविधता काफी समृद्ध है। वर्तमान में भारत में कुल 458 उभयचर प्रजातियों में से 41 सीसिलियन (caecilian) प्रजातियां दर्ज हैं। इस नई खोज के साथ, भारत में Gegeneophis प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिनमें से 11 केवल पश्चिमी घाटों के लिए स्थानिक (endemic) हैं।
ऐतिहासिक रूप से, अधिकांश भारतीय सीसिलियन पश्चिमी घाटों के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं। हालांकि, कुछ प्रजातियां पूर्वोत्तर भारत के आर्द्र वनों और पूर्वी घाटों के कुछ हिस्सों में भी देखी गई हैं। यह खोज पश्चिमी घाटों को एक ग्लोबल बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट के रूप में और अधिक पुख्ता करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Gegeneophis chandgadi कहाँ पाया गया है?
उत्तर: यह प्रजाति महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के चंदगड क्षेत्र (बुजावडे) में पाई गई है।
प्रश्न 2: सीसिलियन (Caecilians) क्या होते हैं?
उत्तर: सीसिलियन पैर रहित उभयचर होते हैं जो आमतौर पर नम मिट्टी में भूमिगत रहते हैं।