नई लेजर तकनीक से शोधकर्ताओं ने यह पुष्टि की कि हीरा 6727°C पर पिघलता है, जो पहले के 700°C अधिक अनुमान से 20% कम है। यह खोज नाभिकीय संलयन और बर्फ‑जायंट ग्रहों के अंदरूनी अध्ययन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

  • हीरे का वास्तविक पिघलने का तापमान 6727°C पाया गया।
  • नया माप पूर्व के 700°C अधिक अनुमान से 20% कम है।
  • परिणाम नाभिकीय संलयन और ग्रह विज्ञान में महत्वपूर्ण हैं।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नवीन लेजर प्रयोग से हीरे के पिघलने के सटीक तापमान का पता लगाया, जिसे 700 डिग्री सेल्सियस कम माना गया था। इस प्रयोग ने 6727°C के तापमान पर हीरे को तरल कार्बन में बदलते हुए दिखाया, जो पहले के 7427°C अनुमान से काफी कम है।

सैद्धांतिक मॉडल और प्रयोगात्मक डेटा के बीच 2240°F (≈1240°C) का अंतर दो दशकों से वैज्ञानिकों को चकित कर रहा था। नई खोज ने इस दुविधा को सुलझाया, यह साबित करते हुए कि हीरा 660-1060 गीगापास्कल दबाव पर पिघलता है।

शोध में उपयोग की गई तकनीक में सौर सतह के तापमान से भी अधिक गर्मी और नेप्च्यून व यूरेनस के केंद्र से अधिक दबाव पर हीरे के नमूनों को संकुचित किया गया। एक्स-रे डिफ्रैक्शन से यह पुष्टि हुई कि हीरा पिघलने से पहले किसी अन्य ठोस कार्बन रूप में नहीं बदलता।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह सटीक तापमान माप नाभिकीय संलयन प्रयोगों में मॉडलिंग को अधिक विश्वसनीय बनाएगा और ग्रह विज्ञान में बर्फ‑जायंट्स के भीतर हीरों की बारिश के परिकल्पना को स्पष्ट करेगा।

“यह खोज नाभिकीय ऊर्जा और खगोल विज्ञान दोनों के लिए नए दायरे खोलती है,” कहते हैं डॉ. मारियस मिलॉट, लॉरेंस लिवरमोर नॅशनल लैबोरेटरी के प्रमुख।
Did You Know?: तरल कार्बन, जो उच्च दबाव पर बनता है, धातु जैसी विद्युत चालकता रखता है और हीरे से भी घनत्व में अधिक हो सकता है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या हीरा सामान्य परिस्थितियों में पिघल सकता है?
A1: नहीं, सामान्य दाब पर हीरा 7000°C से ऊपर के तापमान पर ही पिघलता है।

Q2: इस खोज का नाभिकीय संलयन पर क्या असर है?
A2: यह प्रयोगों में उपयोग होने वाले हीरे के कैप्सूल के अंदर ड्यूटेरियम और ट्रिटियम को सटीक दबाव पर लाने में मदद करेगा।