फीफा ने क्लब विश्व कप और अन्य बड़े टूर्नामेंटों के अधिकारों को 20 अरब डॉलर के विशाल सौदे में बेचने की अपनी विवादास्पद योजना को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। यह फैसला यूरोपीय फुटबॉल शासी निकायों और वैश्विक क्लबों के कड़े विरोध के बाद आया है।

मुख्य बातें

  • फीफा ने बहु-अरब डॉलर के संयुक्त उद्यम सौदे को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
  • इस प्रस्ताव में शुरू में सॉफ्टबैंक सहित बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक शामिल थे।
  • यह निर्णय यूईएफए (UEFA) और यूरोपीय एलीट क्लबों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

विश्व फुटबॉल की शासी निकाय फीफा (FIFA) ने अपने नए विस्तारित क्लब विश्व कप और एक प्रस्तावित वैश्विक नेशंस लीग के वाणिज्यिक अधिकारों को बेचने की अपनी महत्वाकांक्षी 20 बिलियन डॉलर ($20 Billion) की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फीफा ने खेल के बढ़ते व्यवसायीकरण और व्यस्त शेड्यूल को लेकर हो रहे चौतरफा विरोध के बाद इस योजना को वापस लेने का फैसला किया है।

इस योजना को मूल रूप से फीफा अध्यक्ष गियानी इन्फेंटिनो द्वारा बढ़ावा दिया गया था, जिसका उद्देश्य फुटबॉल के वैश्विक ढांचे में भारी बदलाव लाना और फीफा के राजस्व को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाना था। हालांकि, यूरोपीय फुटबॉल संघों के संघ (UEFA) और महाद्वीप के सबसे अमीर क्लबों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि इससे खिलाड़ियों पर काम का बोझ बढ़ेगा और उनकी अपनी घरेलू और क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं की चमक फीकी पड़ जाएगी।

प्रस्तावित सौदा बनाम फीफा का वर्तमान मॉडल

विशेषताप्रस्तावित $20B सौदावर्तमान फीफा मॉडल
वित्तीय सहायतानिजी निवेशकों का संघ (सॉफ्टबैंक आदि)पारंपरिक प्रायोजन और प्रसारण अधिकार
नियंत्रणबाहरी वाणिज्यिक नियंत्रण के साथ संयुक्त उद्यमफीफा और सदस्य संघों द्वारा प्रत्यक्ष नियंत्रण
प्रारूपविस्तारित क्लब विश्व कप और ग्लोबल नेशंस लीगमानक विश्व कप चक्र और छोटा क्लब विश्व कप

यह क्यों महत्वपूर्ण है

बोझोकमीडिया (BozokMedia) के विश्लेषण से पता चलता है कि फीफा और यूईएफए के बीच का यह सत्ता संघर्ष लंबे समय से फुटबॉल की राजनीति का केंद्र रहा है। इस 20 अरब डॉलर के सौदे के रद्द होने से यह स्पष्ट हो गया है कि फीफा चाहकर भी यूरोपीय क्लबों और उनके शासी निकायों की सहमति के बिना वैश्विक फुटबॉल परिदृश्य को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकता है। यह फैसला यूरोपीय फुटबॉल की संप्रभुता को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

फीफा का पीछे हटना यह दर्शाता है कि वैश्विक फुटबॉल पर यूरोपीय क्लबों और यूईएफए का कितना मजबूत नियंत्रण है, और यह साबित करता है कि केवल पैसे के दम पर खेल की परंपराओं में बदलाव नहीं किया जा सकता।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस मेगा-डील की शुरुआत साल 2018 के आसपास हुई थी, जब फीफा को एक रहस्यमयी कंसोर्टियम (निवेशकों के समूह) से एक आकर्षक प्रस्ताव मिला था। बाद में यह खुलासा हुआ कि इस समूह में जापानी दिग्गज सॉफ्टबैंक (SoftBank) और मध्य पूर्वी निवेशक शामिल थे। योजना के तहत हर चार साल में 24 टीमों का क्लब विश्व कप आयोजित किया जाना था, जिससे फीफा को भारी मुनाफा होने की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआत से ही यह योजना विवादों के साए में रही।

क्या आप जानते हैं?: क्लब विश्व कप पहली बार साल 2000 में ब्राजील में आयोजित किया गया था, जिसे ब्राजीलियाई क्लब कोरिंथियंस ने जीता था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. फीफा ने 20 अरब डॉलर की योजना को क्यों रद्द किया?
यूईएफए, प्रमुख यूरोपीय क्लबों के कड़े विरोध, खिलाड़ियों के अत्यधिक व्यस्त शेड्यूल और खेल के अत्यधिक व्यवसायीकरण की चिंताओं के कारण फीफा को इस योजना को रद्द करना पड़ा।

2. इस 20 अरब डॉलर के प्रस्ताव में क्या शामिल था?
इस प्रस्ताव के तहत एक नया और विस्तारित 24-टीमों वाला क्लब विश्व कप और एक नई ग्लोबल नेशंस लीग शुरू करने की योजना थी, जिसे निजी निवेशकों के सहयोग से चलाया जाना था।