देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के नंबर-3 बल्लेबाजी क्रम में अपनी जगह पक्की कर ली है। लगातार दो शतकों और स्पिनरों के खिलाफ बेहतरीन तकनीक के साथ, वे द्रविड़ और पुजारा के उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे हैं।
- देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 328 रन बनाए, जिसमें दो शानदार शतक शामिल हैं।
- पडिक्कल ने स्पिनरों के खिलाफ बैकफुट गेम का उपयोग कर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की।
- टीम इंडिया के लिए नंबर-3 की खाली जगह को भरने में पडिक्कल सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं।
भारतीय क्रिकेट में नंबर-3 की स्थिति हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गजों के बाद, टीम इंडिया एक ऐसे भरोसेमंद बल्लेबाज की तलाश में थी जो तकनीक और धैर्य के साथ पारी को संभाल सके। इस तलाश में देवदत्त पडिक्कल एक चमकते सितारे की तरह उभरे हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में उनके प्रदर्शन ने न केवल चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है, बल्कि क्रिकेट विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
श्रीलंका सीरीज में पडिक्कल का दबदबा
पडिक्कल ने इस सीरीज में गॉल में 167 और कोलंबो में 117 रनों की महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। सीरीज में उनके कुल 328 रन रहे, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ 123 रन बनाए, जो उनकी स्पिन खेलने की क्षमता को दर्शाता है। चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम में शामिल हुए 26 वर्षीय पडिक्कल ने केवल तीन पारियों में ही अपनी काबिलियत साबित कर दी है।
तकनीकी विश्लेषण: स्पिन के खिलाफ अनोखा अंदाज
आमतौर पर भारतीय बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ फ्रंटफुट पर खेलना पसंद करते हैं, लेकिन पडिक्कल की शैली अलग है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ स्पिनरों की लेंथ गेंदों पर 37.4% बार बैकफुट का उपयोग किया। उनकी 6 फीट 3 इंच की ऊंचाई उन्हें बैकफुट पर जाकर कट, पंच और पुल जैसे शॉट खेलने में मदद करती है। यह तकनीक उन्हें उन कठिन परिस्थितियों में भी रन बनाने में सक्षम बनाती है जहाँ अन्य बल्लेबाज संघर्ष कर रहे थे।
पडिक्कल की बैकफुट गेम और स्पिन के खिलाफ उनका संयम उन्हें भारत के अगले महान नंबर-3 बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर सकता है।
भारत के लिए नंबर-3 का महत्व
नंबर-3 का स्थान टेस्ट क्रिकेट में सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि बल्लेबाज को ओपनर की तरह नई गेंद का सामना करना पड़ता है और मिडिल ऑर्डर की तरह पारी को संभालना होता है। द्रविड़ ने इस स्थान पर 10,000 से अधिक रन बनाए, जबकि पुजारा ने 13 वर्षों तक इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। शुभमन गिल, विराट कोहली और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों ने इस स्थान पर प्रयास किए, लेकिन पडिक्कल का हालिया फॉर्म उन्हें इस दौड़ में सबसे आगे रखता है।
घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय तक का सफर
पडिक्कल का सफर काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2025-26 के घरेलू प्रथम श्रेणी सीजन में 47.76 की औसत से 812 रन बनाए। इससे पहले, उन्होंने कर्नाटक की कप्तानी करते हुए टीम को फाइनल तक पहुँचाया था। आईपीएल में भी उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन आरसीबी के साथ उनकी सफलता ने उन्हें एक निडर बल्लेबाज बनाया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या पडिक्कल को स्थायी रूप से नंबर-3 पर जगह मिलेगी?
उत्तर: उनके वर्तमान प्रदर्शन और स्पिन के खिलाफ तकनीक को देखते हुए, वे इस स्थान के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं।
प्रश्न 2: श्रीलंका सीरीज में पडिक्कल का कुल स्कोर क्या था?
उत्तर: उन्होंने सीरीज में कुल 328 रन बनाए, जिसमें दो शतक शामिल थे।