विश्व चैंपियन शीतल देवी ने अहमदाबाद में आयोजित वर्ल्ड आर्चेरी पैरा सीरीज में कजाकिस्तान की आइजादा सेदान को हराकर ऐतिहासिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

  • शीतल देवी ने कजाकिस्तान की आइजादा सेदान को 10-9 के शूट-ऑफ में हराकर कंपाउंड महिला व्यक्तिगत खिताब जीता।
  • उन्होंने क्वालीफिकेशन में 698 का सीजन-बेस्ट स्कोर बनाया, जो एक नया एशियाई रिकॉर्ड है।
  • यह जीत आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों से पहले उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी।

अहमदाबाद की धरती पर अपने घरेलू प्रशंसकों के सामने 19 वर्षीय पैरा-तीरंदाज शीतल देवी ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड आर्चेरी पैरा सीरीज का अपना पहला व्यक्तिगत खिताब जीता। फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहाँ शीतल और कजाकिस्तान की आइजादा सेदान के बीच 144-144 की बराबरी रही, जिसके बाद विजेता का फैसला शूट-ऑफ के जरिए हुआ।

शूट-ऑफ के तनावपूर्ण माहौल में शीतल ने अविश्वसनीय धैर्य दिखाया और सटीक 10 स्कोर किया, जिससे दबाव पूरी तरह से सेदान पर आ गया। कजाकिस्तान की तीरंदाज केवल 9 स्कोर कर सकीं, और इस तरह शीतल ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इससे पहले क्वालीफिकेशन राउंड में शीतल ने 698 का स्कोर कर न केवल टॉप सीड हासिल की, बल्कि अपने ही एशियाई रिकॉर्ड को एक अंक से बेहतर किया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह जीत केवल एक पदक नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि शीतल देवी अब मानसिक रूप से दुनिया की सबसे मजबूत पैरा-तीरंदाजों में से एक हैं। घरेलू भीड़ के दबाव में जीतना यह दर्शाता है कि वे आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जहाँ वे अपने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम खिताबों की रक्षा करेंगी।

शूट-ऑफ के दबाव में परफेक्ट 10 हिट करना यह दर्शाता है कि शीतल अब एक उभरती हुई प्रतिभा से बढ़कर एक परिपक्व चैंपियन बन चुकी हैं।

व्यक्तिगत स्वर्ण के अलावा, शीतल ने तौमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता, जहाँ उन्होंने इराक को 157-145 से हराया। अहमदाबाद में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा, जिसमें श्याम सुंदर स्वामी और हरविंदर सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भी स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शीतल देवी का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं है। बिना हाथों के जन्म लेने के बावजूद, उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति से दुनिया को झुकने पर मजबूर कर दिया। वह ग्वांगजू में 2025 विश्व तीरंदाजी पैरा चैंपियनशिप में विश्व खिताब जीतने वाली बिना हाथों वाली पहली महिला बनीं। इसके अलावा, उन्होंने 2024 पेरिस पैरालंपिक में 17 साल की उम्र में कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बनने का गौरव हासिल किया।

उपलब्धिप्रतियोगितापरिणाम
वर्ल्ड पैरा सीरीज (अहमदाबाद)व्यक्तिगत कंपाउंडस्वर्ण
विश्व पैरा चैंपियनशिप (ग्वांगजू)व्यक्तिगत कंपाउंडस्वर्ण
पेरिस 2024 पैरालंपिकमिश्रित टीमकांस्य
हांगझू एशियाई पैरा गेम्सव्यक्तिगत कंपाउंडस्वर्ण
क्या आप जानते हैं?: शीतल देवी अपने पैरों का उपयोग करके धनुष चलाती हैं, और इसी अद्वितीय कौशल ने उन्हें दुनिया की नंबर 1 रैंकिंग तक पहुँचाया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: शीतल देवी ने फाइनल में किसे हराया?
उन्होंने कजाकिस्तान की आइजादा सेदान को 10-9 के शूट-ऑफ में हराया।

प्रश्न 2: शीतल अब किस अगली बड़ी प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं?
वह जापान में होने वाले आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों की तैयारी कर रही हैं।