तमिलनाडु सरकार 17 अगस्त, 2026 से 'प्रेजेंस-लेस रजिस्ट्रेशन' सिस्टम लॉन्च करने जा रही है। इस डिजिटल पहल से प्रमोटरों और वित्तीय संस्थानों को अब सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
- 17 अगस्त, 2026 से लागू होगा, STAR 3.0 सॉफ्टवेयर पर आधारित।
- प्लॉट और अपार्टमेंट की पहली बिक्री के लिए भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त।
- पहचान सत्यापन के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) का उपयोग।
- प्रथम चरण में प्रमोटरों, बैंकर्स और वित्तीय संस्थानों को लाभ मिलेगा।
शासन के डिजिटलीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, तमिलनाडु सरकार ने 'प्रेजेंस-लेस रजिस्ट्रेशन' (उपस्थिति-रहित पंजीकरण) प्रणाली की घोषणा की है। 17 अगस्त, 2026 से शुरू होने वाली यह पहल STAR 2.0 सॉफ्टवेयर से उन्नत STAR 3.0 (सिम्प्लिफाइड एंड ट्रांसपेरेंट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ रजिस्ट्रेशन) पर स्थानांतरित होने का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके संपत्ति पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाना है।
इस डिजिटल बदलाव का उद्देश्य पंजीकरण विभाग के भीतर लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थागत समस्याओं को हल करना है। भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता को समाप्त करके, सरकार का लक्ष्य बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। इसके अलावा, यह 'शुभ दिनों' के दौरान सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में होने वाली भारी भीड़ की समस्या को भी हल करेगा, जब आमतौर पर पंजीकरणों की संख्या बहुत अधिक होती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव केवल सुविधा नहीं बल्कि रियल एस्टेट इकोसिस्टम में एक संरचनात्मक सुधार है। UIDAI बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को एकीकृत करके, राज्य एक उच्च-विश्वास वाला वातावरण बना रहा है जो धोखाधड़ी को कम करेगा। अर्थव्यवस्था के लिए, इसका अर्थ है होम लोन और संपत्ति हस्तांतरण के लिए कम समय, जो नौकरशाही की बाधाओं को कम करके निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दे सकता है।
आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन का एकीकरण संपत्ति पंजीकरण को एक भौतिक घटना से बदलकर एक सुरक्षित डिजिटल लेनदेन में बदल देता है, जिससे भूमि प्रशासन में 'बिचौलिया संस्कृति' समाप्त हो जाएगी।
इस प्रणाली का तकनीकी ढांचा काफी सख्त है। सेवा का उपयोग करने के लिए, हितधारकों को UIDAI-अनुमोदित L1 फिंगरप्रिंट स्कैनर, एक आइरिस स्कैनर और एक वेबकैम का उपयोग करना होगा। एक बार जब दस्तावेज आधिकारिक पोर्टल (tnreginet.gov.in) पर अपलोड हो जाते हैं, तो निष्पादकों, दावेदारों और गवाहों की पहचान भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के माध्यम से सत्यापित की जाएगी।
सब-रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित होने के बाद, पंजीकृत दस्तावेज़ को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा और ईमेल व मोबाइल के माध्यम से भेजा जाएगा। यदि दस्तावेजों में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो आवेदक को ऑनलाइन जवाब देने के लिए 30 दिनों का समय दिया जाएगा। इस बदलाव को सुचारू बनाने के लिए, सरकार CREDAI प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं और NBFCs के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रही है।
| विशेषता | पारंपरिक पंजीकरण | प्रेजेंस-लेस पंजीकरण |
|---|---|---|
| भौतिक उपस्थिति | सभी पक्षों के लिए अनिवार्य | आवश्यक नहीं (ऑनलाइन) |
| सत्यापन | अधिकारी द्वारा मैनुअल जांच | आधार बायोमेट्रिक/आइरिस स्कैन |
| प्रक्रिया समय | कार्यालय की कतारों पर निर्भर | डिजिटल वर्कफ्लो (30 दिन की क्वेरी विंडो) |
| बिचौलिये | एजेंटों पर उच्च निर्भरता | पोर्टल से सरकार का सीधा जुड़ाव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पहले चरण में इस सेवा का उपयोग कौन कर सकता है?
पहला चरण फ्लैट और प्लॉट प्रमोटरों, बैंकर्स और वित्तीय संस्थानों के लिए संपत्तियों की पहली बिक्री तक सीमित है।
प्रश्न 2: यदि सब-रजिस्ट्रार को अपलोड किए गए दस्तावेजों में कोई गलती मिलती है तो क्या होगा?
आवेदक को ऑनलाइन एक क्वेरी प्राप्त होगी और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने से पहले उसे जवाब देने या सुधार करने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा।