फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज अपने मानव रूपी रोबोट्स को घातक सैन्य क्षमताओं से लैस करने की योजना बना रही है। एरिक ट्रंप के रणनीतिक सलाहकार होने से यह स्टार्टअप चर्चा में है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज घातक क्षमताओं वाले 'सुपर सोल्जर' रोबोट विकसित कर रही है।
- एरिक ट्रंप कंपनी के मुख्य रणनीतिक सलाहकार और निवेशक हैं।
- कंपनी का लक्ष्य युद्ध क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, टोही और निरीक्षण के कार्यों को संभालना है।
- विशेषज्ञों ने स्वायत्त रोबोटिक सैनिकों की तकनीकी और नैतिक चुनौतियों पर सवाल उठाए हैं।
दुनिया भर में रोबोटिक्स की दौड़ अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रह गई है। फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज (Foundation Future Industries) नामक एक नया स्टार्टअप अब युद्ध के मैदान में बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के सीईओ सांकेत पाठक (Sankaet Pathak) ने संकेत दिया है कि उनकी कंपनी जल्द ही अपने 'ह्यूमनॉइड' (मानव रूपी) रोबोट्स को घातक सैन्य क्षमताओं से लैस करने वाली है। पाठक ने 'WIRED' को बताया कि वे कुछ 'काइनेटिक' (गतिज) चीजों पर काम कर रहे हैं, जिसका सीधा अर्थ हथियार प्रणालियों से है।
राजनीतिक और रणनीतिक जुड़ाव
इस कंपनी की सबसे बड़ी चर्चा का विषय इसका राजनीतिक जुड़ाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति के पुत्र एरिक ट्रंप (Eric Trump) न केवल इस कंपनी के निवेशक हैं, बल्कि वे इसके मुख्य रणनीतिक सलाहकार के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में फॉक्स बिजनेस के साथ एक साक्षात्कार में इन रोबोट्स की प्रशंसा करते हुए कहा कि एआई स्वायत्तता सैन्य अनुप्रयोगों को पूरी तरह बदल देगी। हालांकि, कंपनी के सरकारी अनुबंधों को लेकर कुछ अस्पष्टता है, लेकिन इसके पास पहले से ही महत्वपूर्ण रक्षा-संबंधी तकनीक और विशेषज्ञता मौजूद है।
तकनीकी चुनौतियां और युद्ध का भविष्य
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान सबसे अधिक जोखिम 'डोर-टू-डोर' तलाशी लेने में होता है, जहाँ रोबोट सैनिकों का उपयोग जानमाल के नुकसान को कम कर सकता है। फाउंडेशन का रोबोट 'Phantom MK1' पहले ही यूक्रेन की सेनाओं के साथ परीक्षण किया जा चुका है। हालांकि, रोबोटिक्स विशेषज्ञों का एक वर्ग चेतावनी दे रहा है। एमआईटी (MIT) के प्रोफेसर रोडनी ब्रूक्स (Rodney Brooks) जैसे दिग्गजों का मानना है कि जटिल और अज्ञात वातावरण में रोबोट्स को विश्वसनीय रूप से तैनात करने में अभी एक दशक से अधिक का समय लग सकता है।
नैतिकता और 'टर्मिनेटर' का डर
मानव रूपी रोबोट्स को घातक हथियारों से लैस करने का विचार दुनिया भर में गंभीर नैतिक प्रश्न खड़े कर रहा है। क्या एक मशीन को यह निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए कि किसे मारना है? क्या स्वायत्तता से युद्ध अधिक सटीक होगा या यह अनियंत्रित विनाश का कारण बनेगा? जहाँ पाठक इन 'डूम्सडे' (प्रलय) परिदृश्यों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मानते हैं, वहीं आलोचक इसे 'टर्मिनेटर' जैसी डरावनी वास्तविकता के करीब देखते हैं।