भारत के एआई मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितना समावेशी है। यदि डेटा और विकास प्रक्रिया में महिलाओं और हाशिए के समुदायों की भागीदारी नहीं बढ़ाई गई, तो एआई मौजूदा सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है।
- एआई पाइपलाइन में महिलाओं की भागीदारी STEM स्नातक (43%) से घटकर नेतृत्व भूमिकाओं में मात्र 10% रह जाती है।
- डेटा में विविधता की कमी से एआई मॉडल सामाजिक पूर्वाग्रहों और असमानताओं को दोहरा सकते हैं।
- भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) समावेशी एआई बनाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
- सच्ची एआई नेतृत्वता केवल पेटेंट से नहीं, बल्कि विविधता के प्रतिनिधित्व से मापी जाएगी।
एआई (AI) प्रणाली की शुरुआत डेटा से होती है, और हर डेटासेट की शुरुआत लोगों से होती है। जब डेटा में लोग गायब होते हैं, तो एआई उन कमियों को अपना लेता है। भारत वर्तमान में दुनिया के अग्रणी एआई-तैयार देशों में से एक है, जो अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जाना जाता है। हालांकि, इस प्रगति के पीछे एक गहरा संरचनात्मक विरोधाभास छिपा है।
आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। भारत में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) स्नातकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है, लेकिन जैसे-जैसे हम तकनीकी कार्यबल में आगे बढ़ते हैं, यह घटकर 26 प्रतिशत रह जाती है। उन्नत एआई भूमिकाओं में यह केवल 12 प्रतिशत है, और वरिष्ठ एआई नेतृत्व पदों पर महिलाओं की भागीदारी मात्र 10 प्रतिशत है। यह 'पाइपलाइन लीकेज' न केवल प्रतिभा का नुकसान है, बल्कि नवाचार की कमी का भी कारण है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि एआई केवल कोड और सिलिकॉन का खेल नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय प्रक्रिया है। यदि एआई प्रशिक्षण डेटा में महिलाओं के अनुभवों, स्थानीय भाषाओं और सामाजिक वास्तविकताओं को शामिल नहीं किया जाता है, तो यह तकनीक अनजाने में भेदभाव को स्वचालित कर देगी। उदाहरण के लिए, यदि ऋण देने वाले एआई मॉडल केवल पारंपरिक पुरुष वित्तीय पैटर्न पर आधारित हैं, तो वे ग्रामीण महिलाओं की ऋण पात्रता को कम आंक सकते हैं।
एआई केवल मौजूदा असमानताओं को स्वचालित नहीं करता, बल्कि यदि डेटा अधूरा है, तो यह उन्हें और अधिक गहरा बना देता है।
लैंगिक अंतराल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। इंटरनेट तक पहुंच के मामले में भी भारी अंतर है; केवल 57 प्रतिशत महिलाओं के पास स्वतंत्र इंटरनेट पहुंच है, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 72 प्रतिशत है। शिक्षा, देखभाल की जिम्मेदारियां और भाषाई बाधाएं इस अंतर को और बढ़ा देती हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और अवसर
भारत के पास समावेशिता का एक मजबूत ऐतिहासिक आधार है। 1950 में संविधान अपनाते समय, भारत ने महिलाओं और पुरुषों को एक साथ सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया था। यही समावेशी दृष्टिकोण अब 'इंडिया एआई मिशन' (India AI Mission) के माध्यम से एआई के क्षेत्र में भी लागू किया जा सकता है।
एआई के माध्यम से अवसर भी बढ़ाए जा सकते हैं। ग्रामीण भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों ने पहले ही वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी ताकत दिखाई है। यदि एआई को इन समुदायों के अनुरूप बनाया जाता है, तो यह स्वास्थ्य सेवा से लेकर वित्त तक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
Frequently Asked Questions
1. एआई में लैंगिक असमानता क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि अधूरा डेटा एआई मॉडल में पूर्वाग्रह पैदा करता है, जिससे महिलाओं और हाशिए के समुदायों को सेवाओं (जैसे ऋण या स्वास्थ्य) से वंचित किया जा सकता है।
2. इंडिया एआई मिशन का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भारत में एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है, जिसमें समावेशिता और सार्वजनिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।