ISHRAE ने 'K-12 नेट-जीरो ऊर्जा स्कूल पहल' के तहत ग्रामीण और अर्ध-शहरी प्राथमिक स्कूलों को पूर्णतः ऊर्जा-स्वतंत्र बनाने की घोषणा की है। यह कदम भारत के 2070 नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

  • ISHRAE अपने अध्यायों के माध्यम से प्राथमिक स्कूलों को नेट-जीरो ऊर्जा केंद्रों में बदलेगा।
  • यह पहल 'K-12 नेट-जीरो ऊर्जा स्कूल पहल' के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
  • यह कदम भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य का समर्थन करता है।
  • HVAC क्षेत्र के बाजार के 2030 तक $29.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

कोयंबटूर: इंडियन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (ISHRAE) ने शिक्षा और स्थिरता के संगम पर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। कोयंबटूर में आयोजित तीन दिवसीय 'कूल कॉन्क्लेव' के समापन के अवसर पर, संस्था ने घोषणा की है कि वह अपने विभिन्न अध्यायों को ग्रामीण या अर्ध-शहरी प्राथमिक स्कूलों को गोद लेने और उन्हें नेट-जीरो ऊर्जा केंद्रों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना ISHRAE की विशेष 'K-12 नेट-जीरो ऊर्जा स्कूल पहल' का हिस्सा है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक समर्पित समिति द्वारा की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि इन स्कूलों में ऊर्जा दक्षता के उच्चतम मानकों को लागू किया जाए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल ऊर्जा की बचत करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को टिकाऊ जीवन शैली के बारे में व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना भी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है, शैक्षणिक संस्थानों को ऊर्जा-कुशल बनाना एक रणनीतिक आवश्यकता है। ISHRAE की यह पहल सीधे तौर पर भारत के 2070 नेट-जीरो लक्ष्य और ऊर्जा संरक्षण के राष्ट्रीय एजेंडे के साथ मेल खाती है।

तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ही हम वास्तविक कार्बन तटस्थता प्राप्त कर सकते हैं।

ISHRAE वर्तमान में देश के 60 शहरों में 54 अध्यायों और उप-अध्यायों के माध्यम से सक्रिय है। संस्था न केवल ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) के क्षेत्र में पेशेवर कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। संस्था द्वारा संचालित प्रमाणित पाठ्यक्रम, जैसे HVAC डिजाइन और कोल्ड स्टोरेज संचालन, उद्योग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं।

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो HVAC क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। अनुमान है कि 16.3% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ, यह बाजार 2030 तक $29.4 बिलियन तक पहुंच जाएगा। इस वृद्धि के बीच, ISHRAE का ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के साथ सहयोग और 'इंडिया कूलिंग कोलैबोरेशन' में इसकी सक्रिय भूमिका इसे स्थिरता के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने पेरिस समझौते के तहत वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। नेट-जीरो का अर्थ है कि वातावरण में छोड़ी जाने वाली ग्रीनहाउस गैसों और वातावरण से हटाई जाने वाली गैसों के बीच संतुलन होना चाहिए। स्कूलों को इस मॉडल पर लाना भविष्य के इंजीनियरों और नागरिकों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में कार्य करेगा।

Did You Know?: नेट-जीरो स्कूल वे होते हैं जो एक वर्ष में जितनी ऊर्जा का उपयोग करते हैं, उतनी ही या उससे अधिक ऊर्जा स्वयं उत्पन्न करते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नेट-जीरो ऊर्जा केंद्र क्या है?
उत्तर: यह एक ऐसा स्थान है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों को सौर या अन्य नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य हो जाता है।

प्रश्न 2: ISHRAE कौन सी संस्था है?
उत्तर: यह हीटिंग, रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम करने वाली एक प्रमुख पेशेवर संस्था है।