प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स के साथ बातचीत करते हुए निजी क्षेत्र को वैश्विक नवाचार का प्रतीक बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने भारत की लागत-प्रतिस्पर्धा और प्रतिभा की ताकत पर जोर दिया।
- पीएम मोदी ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक नवाचार का 'आभा मंडल' (Aura) बनाने का आग्रह किया।
- भारत की लागत-प्रतिस्पर्धा और जोखिम लेने की क्षमता को वैश्विक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।
- स्पेस स्टार्टअप्स का लक्ष्य 2027 तक प्रति माह एक लॉन्च का लक्ष्य हासिल करना है।
- सरकार ने अंतरिक्ष तकनीक को कृषि और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में लागू करने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के बढ़ते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को एक नई दिशा देते हुए निजी क्षेत्र से वैश्विक स्तर पर नवाचार का केंद्र बनने का आह्वान किया है। शुक्रवार (21 अगस्त, 2026) को 20 प्रमुख अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के सीईओ और संस्थापकों के साथ संवाद करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत को एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां दुनिया भर के लोग करियर बनाने के लिए भारत की ओर आकर्षित हों।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में कोई बड़ी सफलता हासिल होती है, तो पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिक जाती हैं। उन्होंने कहा, "हमें एक ऐसा आभा मंडल बनाना होगा जहां दुनिया भर के लोग महसूस करें कि यदि वे अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें भारत आना चाहिए।" उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक प्रतिभा को एक चुंबक की तरह आकर्षित कर सकते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना केवल एक आर्थिक सुधार नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्थिति को बदलने वाला कदम है। लागत-कुशलता और उच्च स्तरीय प्रतिभा का संयोजन भारत को 'स्पेस हब' के रूप में स्थापित कर सकता है।
"भारत की लागत-प्रतिस्पर्धा और जोखिम लेने की क्षमता हमें वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है।"
इस संवाद के दौरान, स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों ने बताया कि अंतरिक्ष उद्योग के निजीकरण के बाद एक सकारात्मक रुझान देखा गया है। अमेरिका और यूरोप में रहने वाले कई भारतीय नागरिक अब वापस आकर देश में काम करने के इच्छुक हैं। Skyroot Aerospace जैसे स्टार्टअप्स ने भारत के पहले निजी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करके एक नई मिसाल कायम की है।
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप संस्थापकों के साहस की सराहना की और कहा कि उन्होंने सरकार की नीतियों पर भरोसा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों में निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि जोखिम लेने वाले उद्यमियों को सुरक्षा का अहसास हो सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग केवल उपग्रहों तक सीमित न रहकर कृषि, पशुपालन, डेयरी और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी किया जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए कैसे खुला है?
सरकार ने अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रक्षेपण में निजी भागीदारी की अनुमति दी है, जिससे स्टार्टअप्स को रॉकेट निर्माण और उपग्रह सेवाओं में निवेश करने का अवसर मिला है।
2. प्रमुख भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स कौन से हैं?
Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel और Dhruva Space जैसे स्टार्टअप इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।