पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो शाइलेश मुरलीधरन ने बताया कि कैसे डेटा केंद्रों के विस्तार से जल और बिजली प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर विरोध बढ़ रहा है।

  • डेटा केंद्रों के विस्तार से बिजली और पानी की भारी खपत हो रही है।
  • वैश्विक स्तर पर स्थानीय समुदायों में इन केंद्रों के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है।
  • पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट एक 'डेटा सेंटर रेडिनेस इंडेक्स' विकसित कर रहा है।
  • डेटा केंद्रों के स्थान चयन में पारदर्शिता की भारी कमी है।

डिजिटल युग के विस्तार के साथ, डेटा केंद्रों (Data Centres) की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि, इस विकास के पीछे एक गहरा संकट छिपा है। पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो शाइलेश मुरलीधरन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि दुनिया भर में डेटा केंद्रों के निर्माण को लेकर स्थानीय समुदायों में विरोध की भावना तेजी से बढ़ रही है।

शाइलेश मुरलीधरन के अनुसार, डेटा केंद्र इतिहास के सबसे तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे में से एक हैं। कुछ रिपोर्टों का तो यहां तक कहना है कि डेटा केंद्र निर्माण अब सामान्य कार्यालय निर्माण को भी पीछे छोड़ सकता है। लेकिन यह विकास बिना किसी कीमत के नहीं आ रहा है। इन विशाल केंद्रों को संचालित करने के लिए अत्यधिक मात्रा में बिजली (Power) और पानी (Water) की आवश्यकता होती है, जो स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव डालता है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डेटा केंद्रों का स्थान चयन अक्सर स्थानीय निवासियों की जरूरतों और संसाधनों की उपलब्धता की अनदेखी करता है। जब एक नया डेटा केंद्र आता है, तो वह न केवल ग्रिड से भारी बिजली खींचता है, बल्कि कूलिंग के लिए लाखों गैलन पानी का उपयोग भी करता है, जिससे स्थानीय जल स्तर और बिजली की दरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

डेटा केंद्रों के स्थान चयन में पारदर्शिता की कमी ही समुदायों के बीच बढ़ते अविश्वास का मुख्य कारण है।

इस समस्या के समाधान के लिए, पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट एक 'डेटा सेंटर रेडिनेस इंडेक्स' (Data Center Readiness Index) पर काम कर रहा है। यह इंडेक्स किसी देश या शहर की डेटा केंद्र विकास के लिए तत्परता को मापने के लिए विभिन्न मानकों का उपयोग करेगा, जिसमें नेटवर्क कनेक्टिविटी, नियामक स्पष्टता, और समुदाय की भावना शामिल है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले दशक में, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI के उदय ने डेटा केंद्रों की आवश्यकता को दस गुना बढ़ा दिया है। पहले ये केंद्र केवल बड़े तकनीकी दिग्गजों तक सीमित थे, लेकिन अब ये हर शहर के करीब पहुंच रहे हैं। इस अनियंत्रित विस्तार ने पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन से संबंधित नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

शाइलेश मुरलीधरन, जिनके पास MIT और Harvard Business School जैसी संस्थाओं से शिक्षा और Amazon Web Services जैसे दिग्गजों में काम करने का अनुभव है, का मानना है कि सूचना की विषमता (Information Asymmetry) को कम करना अनिवार्य है। वर्तमान में, बड़े बिल्डरों के पास तो विस्तृत डेटा होता है, लेकिन सरकारी अधिकारियों के पास केवल भूमि मानचित्र होते हैं, जिससे गलत निर्णय लिए जाने की संभावना रहती है।

क्या आप जानते हैं?: डेटा केंद्रों को ठंडा रखने के लिए उपयोग किया जाने वाला पानी अक्सर स्थानीय जल प्रणालियों का एक बड़ा हिस्सा होता है, जो सूखे प्रभावित क्षेत्रों में संकट पैदा कर सकता है।

Frequently Asked Questions

1. डेटा केंद्र समुदायों के लिए खतरा क्यों हैं?
मुख्य रूप से बिजली की अत्यधिक खपत और पानी के संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण, जो स्थानीय निवासियों की जरूरतों को प्रभावित कर सकते हैं।

2. 'डेटा सेंटर रेडिनेस इंडेक्स' क्या है?
यह एक नया शोध उपकरण है जो यह मापेगा कि कोई क्षेत्र डेटा केंद्रों के लिए कितना उपयुक्त और टिकाऊ है।