भारतीय कॉपीराइट कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि AI द्वारा निर्मित कार्य 'मौलिक' हो सकता है और संरक्षित किया जा सकता है, लेकिन AI सिस्टम को कानूनी रूप से 'लेखक' नहीं माना जा सकता। यह फैसला स्टीफन थालर और उनके AI सिस्टम 'DABUS' से जुड़े एक मामले के बाद आया है।
- AI द्वारा निर्मित कार्य को 'मौलिक' माना जा सकता है और उसे कॉपीराइट सुरक्षा मिल सकती है।
- कॉपीराइट अधिनियम के तहत 'लेखक' केवल एक मानव (व्यक्ति) हो सकता है, मशीन नहीं।
- यह निर्णय स्टीफन थालर के AI सिस्टम 'DABUS' द्वारा बनाई गई कलाकृति से संबंधित है।
भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले कॉपीराइट कार्यालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम को किसी भी कृति का लेखक नहीं माना जा सकता। हालांकि, कार्यालय ने यह भी माना कि AI द्वारा बनाया गया कार्य स्वयं कॉपीराइट कानून के तहत संरक्षित किया जा सकता है, बशर्ते वह मौलिक हो।
यह मामला अमेरिकी AI शोधकर्ता और इमेजिनेशन इंजनों के सीईओ स्टीफन थालर से जुड़ा है, जिन्होंने अपने AI सिस्टम DABUS (Device for the Autonomous Bootstrapping of Unified Sentience) द्वारा बनाई गई एक कलाकृति, 'A Recent Entrance to Paradise' के लिए कॉपीराइट पंजीकरण की मांग की थी। थालर ने तर्क दिया कि DABUS ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के, अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से इस कृति का सृजन किया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय भारत के रचनात्मक उद्योगों जैसे मीडिया, संगीत, गेमिंग और प्रकाशन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जब बड़ी कंपनियां सामग्री उत्पादन के लिए AI का व्यापक उपयोग कर रही हैं, तो यह स्पष्टता कि 'आउटपुट' संरक्षित है लेकिन 'मशीन' लेखक नहीं, कानूनी विवादों को कम करेगी। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि तकनीकी स्वायत्तता (Autonomy) का अर्थ कानूनी व्यक्तित्व (Legal Personality) नहीं है।
कॉपीराइट रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) उन्नत पंडित ने अपने आदेश में कहा कि यद्यपि DABUS ने गणनात्मक प्रक्रियाएं स्वतंत्र रूप से कीं, लेकिन वह उन मापदंडों और आर्किटेक्चर के भीतर काम कर रहा था जिसे डॉ. थालर ने कॉन्फ़िगर किया था। इसलिए, सृजन का श्रेय उस व्यक्ति को जाता है जिसने सिस्टम को बनाया और निर्देशित किया।
"स्वायत्तता का अर्थ यह नहीं है कि मशीन ने कृति की कल्पना की है; यह केवल उस व्यक्ति के निर्देशों का निष्पादन है जिसने सिस्टम को स्थापित किया है।"
ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो, यह मामला वैश्विक स्तर पर चल रही एक बड़ी बहस का हिस्सा है। स्टीफन थालर ने दुनिया भर के 16 न्यायालयों में इसी तरह की याचिकाएं दायर की हैं। अमेरिका में भी मार्च 2025 में अदालत ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि कॉपीराइट अधिनियम के लिए 'मानवीय लेखक' का होना अनिवार्य है।
| क्षेत्र | AI लेखक की स्थिति | कार्य की सुरक्षा |
|---|---|---|
| भारत | अस्वीकृत (केवल मानव) | संभव (यदि मौलिक हो) |
| अमेरिका | अस्वीकृत (मानव अनिवार्य) | सीमित/कठोर शर्तें |
| यूके/आयरलैंड | मानव/व्यवस्थापक को श्रेय | सुरक्षित |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या AI द्वारा बनाई गई पेंटिंग को कॉपीराइट मिल सकता है?
हाँ, कॉपीराइट कार्यालय के अनुसार, यदि कार्य मौलिक है और किसी अन्य स्रोत से कॉपी नहीं किया गया है, तो कार्य को सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन लेखक का नाम एक मनुष्य का होना चाहिए।
प्रश्न 2: इस फैसले का क्रिएटिव इंडस्ट्री पर क्या असर होगा?
इससे यह स्पष्ट होता है कि AI टूल्स का उपयोग करने वाले मानव रचनाकारों को उनके अंतिम आउटपुट पर अधिकार मिल सकते हैं, जिससे AI-जनित सामग्री का व्यावसायिक उपयोग कानूनी रूप से सुरक्षित होगा।