सांसद एम. श्रीभारत ने विशाखापत्तनम में गूगल डेटा सेंटर के कारण पानी की कमी और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुविधा पानी के बजाय एयर-कूलिंग तकनीक का उपयोग करेगी।
- गूगल विशाखापत्तनम डेटा सेंटर में पानी के बजाय एयर-कूलिंग तकनीक का उपयोग करेगा।
- सांसद ने जल आपूर्ति और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की चिंताओं को खारिज किया।
- डेटा सेंटर से स्थानीय स्टार्टअप, फिनटेक और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के विकास की उम्मीद है।
विशाखापत्तनम में प्रस्तावित गूगल डेटा सेंटर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, स्थानीय सांसद एम. श्रीभारत ने शनिवार को महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने उन चिंताओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें डेटा सेंटर के कारण पानी की भारी खपत, गर्मी बढ़ने और सीमित रोजगार सृजन की आशंका जताई जा रही थी।
सांसद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि गूगल ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि यह सुविधा एयर-कूलिंग तकनीक (Air-cooling technology) का उपयोग करेगी, न कि जल-शीतलन (Water-cooling) का। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अन्य डेटा सेंटर जल-शीतलन का उपयोग करते भी हैं, तो भी विशाखापत्तनम की जल आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विशाखापत्तनम जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में डेटा सेंटर की स्थापना एक दोधारी तलवार की तरह है। जहाँ एक ओर यह डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संसाधनों पर दबाव की आशंका बनी रहती है। सांसद का यह बयान निवेशकों के बीच विश्वास जगाने और स्थानीय विरोध को शांत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है।
डेटा सेंटर को केवल एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परिसंपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए जो पूरे आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को बदल सकती है।
पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, श्रीभारत ने कहा कि यदि डेटा सेंटर से रेडिएशन या अत्यधिक गर्मी का खतरा होता, तो उन्हें पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) कभी नहीं मिलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंपस के भीतर गर्मी उत्पन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका समुदाय पर व्यापक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रोजगार के मुद्दे पर, सांसद ने तर्क दिया कि यह निवेश केवल प्रत्यक्ष नौकरियों तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र (Economic Ecosystem) तैयार करेगा, जिससे स्टार्टअप, फिनटेक संस्थान और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) आकर्षित होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डेटा सेंटर के लिए आवश्यक एयर-कंडीशनिंग उपकरण आंध्र प्रदेश में ही निर्मित होते हैं, जिससे राज्य के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
Historical Background
विशाखापत्तनम, जिसे 'स्टील सिटी' के रूप में जाना जाता है, लंबे समय से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र रहा है। हाल के वर्षों में, सरकार का ध्यान पारंपरिक भारी उद्योगों से हटकर डिजिटल अर्थव्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी की ओर स्थानांतरित हुआ है, जिससे डेटा सेंटर के लिए इस क्षेत्र में रुचि बढ़ी है।
Frequently Asked Questions
1. क्या गूगल डेटा सेंटर से विशाखापत्तनम में पानी की कमी होगी?
नहीं, सांसद के अनुसार, गूगल एयर-कूलिंग तकनीक का उपयोग करेगा, जिससे पानी की खपत न्यूनतम होगी।
2. इस डेटा सेंटर से स्थानीय लोगों को क्या लाभ होगा?
यह क्षेत्र में स्टार्टअप्स और फिनटेक कंपनियों को आकर्षित करेगा, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आर्थिक विकास होगा।