आईआईटी दिल्ली के प्रसिद्ध प्रोफेसर और जलवायु विज्ञान के दिग्गज कृष्ण अचुतराव का 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके शोध ने भारत में मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक कृष्ण अचुतराव का 4 सितंबर, 2026 को निधन।
- उन्होंने मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- आईआईटी दिल्ली में उन्होंने वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के प्रमुख के रूप में कार्य किया।
- उन्होंने हीट वेव और मानसून अनुसंधान में एआई (AI) उपकरणों का उपयोग किया।
जलवायु और वायुमंडलीय विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख आवाज, आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज के प्रोफेसर कृष्ण अचुतराव का 4 सितंबर, 2026 को निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल भारतीय वैज्ञानिक समुदाय बल्कि वैश्विक जलवायु अनुसंधान जगत में एक बड़ी शून्यता पैदा हो गई है।
अचुतराव का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह निर्धारित करना था कि देखे गए जलवायु परिवर्तनों में मानवीय गतिविधियों की कितनी भूमिका है। वर्षों तक उनके शोध ने यह सिद्ध किया कि भारतीय उप-क्षेत्रों में तापमान परिवर्तन में मानव निर्मित कारकों का स्पष्ट प्रभाव है। उनके इस कार्य ने वैश्विक जलवायु विज्ञान को भारत के क्षेत्रीय जोखिमों से जोड़ने में एक सेतु का काम किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, अचुतराव का काम केवल अकादमिक नहीं था, बल्कि यह भारत की आपदा प्रबंधन नीतियों के लिए आधारशिला था। जैसे-जैसे भारत में हीट वेव और अनियमित मानसून की घटनाएं बढ़ रही हैं, उनके द्वारा विकसित किए गए 'एट्रीब्यूशन मॉडल' (Attribution Models) नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद करते हैं कि कौन सी घटना प्राकृतिक है और कौन सी मानवजनित।
कृष्ण एक स्पष्ट और सिद्धांतवादी आलोचक थे, विशेष रूप से तब जब वैज्ञानिक निष्पक्षता से समझौता किया जाता था।
अपने दो दशकों के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने आईआईटी दिल्ली में वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के प्रमुख और डीन (फैकल्टी) के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने संस्थान के 'क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंजीनियरिंग स्नातक होने के नाते, उन्होंने अमेरिका में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी में भी काम किया, जिसके बाद वह 2007 में भारत लौट आए।
उनके सहयोगियों ने उन्हें एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक के साथ-साथ एक दयालु और मजाकिया व्यक्तित्व के रूप में याद किया। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के वैज्ञानिक रोक्सी मैथ्यू कोल ने उनके निधन को भारतीय जलवायु विज्ञान के लिए एक बड़ी क्षति बताया। वहीं, पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव माधववन राजीवन ने उल्लेख किया कि अचुतराव ने हाल के वर्षों में हीट वेव जैसे जलवायु घटनाओं के विश्लेषण के लिए एआई (AI) उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कृष्ण अचुतराव का मुख्य शोध क्षेत्र क्या था?
उत्तर: उनका मुख्य शोध मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन और भारतीय उप-क्षेत्रों में तापमान परिवर्तन के प्रभावों पर केंद्रित था।
प्रश्न 2: उन्होंने आईआईटी दिल्ली में क्या भूमिका निभाई?
उत्तर: उन्होंने वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के प्रमुख और डीन (फैकल्टी) के रूप में कार्य किया और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में मदद की।