हैदराबाद स्थित CSIR-NGRI ने पृथ्वी संसाधनों के अन्वेषण के लिए मैग्नेटोटेल्यूरिक तकनीक पर एक गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य भू-वैज्ञानिक कौशल को बढ़ावा देना है।

  • CSIR-NGRI द्वारा मैग्नेटोटेल्यूरिक (MT) अन्वेषण पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।
  • प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के subsurface संरचनाओं और संसाधनों का सटीक आकलन करना है।
  • कार्यक्रम में निदेशक प्रकाश कुमार और वरिष्ठ वैज्ञानिकों की देखरेख में 11 विशेषज्ञ प्रतिभागी शामिल।

हैदराबाद के हब्सिगुडा परिसर में स्थित CSIR-राष्ट्रीय भू-भौतिकी अनुसंधान संस्थान (NGRI) ने पृथ्वी संसाधनों के लिए मैग्नेटोटेल्यूरिक अन्वेषण पर एक विशेष पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी की। यह कार्यक्रम 7 सितंबर से 11 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया गया, जो CSIR एकीकृत कौशल पहल (Integrated Skill Initiative) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य प्रतिभागियों के ज्ञान को बढ़ाना और मैग्नेटोटेल्यूरिक (MT) अन्वेषण में व्यावहारिक कौशल विकसित करना है। यह एक उन्नत भू-भौतिकीय तकनीक है जिसका उपयोग पृथ्वी की सतह के नीचे की जटिल संरचनाओं की जांच करने और महत्वपूर्ण खनिज एवं जल संसाधनों का आकलन करने के लिए किया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत की संसाधन सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जैसे-जैसे पारंपरिक संसाधन कम हो रहे हैं, MT जैसी गैर-आक्रामक (non-invasive) तकनीकों का उपयोग गहरे स्तर पर छिपे संसाधनों को खोजने में मदद करेगा, जिससे खनन और जल प्रबंधन में क्रांति आ सकती है।

मैग्नेटोटेल्यूरिक अन्वेषण पृथ्वी की विद्युत चालकता का विश्लेषण कर हमें बिना खुदाई किए जमीन के नीचे की सटीक तस्वीर प्रदान करता है।

उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक प्रकाश कुमार के साथ-साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक अभय राम बंसल, ई.वी.एस.एस.के. बाबू, के. रामा मोहन, बी.पी.के. पात्रा और के.के. अब्दुल अजीज उपस्थित थे। इन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में 11 चयनित प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

CSIR-NGRI दशकों से भारत में भू-भौतिकी अनुसंधान का नेतृत्व कर रहा है। मैग्नेटोटेल्यूरिक तकनीक, जो प्राकृतिक विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करती है, ने वैश्विक स्तर पर भू-तापीय ऊर्जा और गहरे खनिज भंडारों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत में इसका विस्तार अब अधिक सूक्ष्म और सटीक मैपिंग की ओर बढ़ रहा है।

क्या आप जानते हैं?: मैग्नेटोटेल्यूरिक तकनीक वास्तव में पृथ्वी के प्राकृतिक विद्युत चुंबकीय शोर (Electromagnetic Noise) का उपयोग करती है, जिससे कृत्रिम स्रोतों की आवश्यकता नहीं पड़ती।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मैग्नेटोटेल्यूरिक (MT) अन्वेषण क्या है?
उत्तर: यह एक भू-भौतिकीय विधि है जो पृथ्वी की सतह पर प्राकृतिक विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के उतार-चढ़ाव को मापकर उप-सतह की विद्युत चालकता का मानचित्रण करती है।

प्रश्न 2: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और पेशेवरों को पृथ्वी के संसाधनों की खोज के लिए आधुनिक MT तकनीकों में कुशल बनाना है।