केरल राज्य पुरातत्व विभाग कन्नूर के करिवेलूर में सात प्राचीन मेगालिथिक 'कुडाक्कल' या छाता पत्थरों के वैज्ञानिक बहाली और जांच की योजना बना रहा है। ये स्मारक 3,000 साल से अधिक पुराने हैं और क्षेत्र के प्राचीन इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- कन्नूर के करिवेलूर में सात प्राचीन मेगालिथिक 'कुडाक्कल' (छाता पत्थर) का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
- ये स्मारक लगभग 3,000 साल पुराने हैं और मेगालिथिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- पुरातत्व विभाग पत्थरों की बहाली के साथ-साथ उनके नीचे दबे अवशेषों की वैज्ञानिक जांच भी करेगा।
केरल राज्य पुरातत्व विभाग ने कन्नूर जिले के करिवेलूर क्षेत्र में स्थित कोझुम्माल-पेरालम में सात मेगालिथिक 'कुडाक्कल' या छाता पत्थरों के वैज्ञानिक जांच और बहाली की घोषणा की है। इस महत्वपूर्ण कार्य के ओणम त्योहार के तुरंत बाद शुरू होने की उम्मीद है।
कुडाक्कल क्या है?
एक 'कुडाक्कल' या छाता पत्थर में चार खड़े ऊर्ध्वाधर स्लैब (orthostats) होते हैं, जो एक गुंबद के आकार के ऊपरी पत्थर (capstone) को सहारा देते हैं। ये विशिष्ट समाधि स्मारक मेगालिथिक काल से जुड़े हैं और केरल के विभिन्न जिलों जैसे त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड में बिखरे हुए पाए जाते हैं।
बहाली और वैज्ञानिक जांच
पझस्सी राजा पुरातत्व संग्रहालय के प्रभारी पुरातत्वविद् के. कृष्णराज ने बताया कि मुख्य उद्देश्य इन पत्थरों को सावधानीपूर्वक पुनर्व्यवस्थित करना और संरक्षित करना है, क्योंकि इनमें से अधिकांश गिर चुके हैं। विभाग यह भी जांच करेगा कि क्या इन स्मारकों के नीचे कोई प्राचीन मिट्टी के बर्तन या अन्य अवशेष मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां व्यापक खुदाई की योजना नहीं है।
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह करिवेलूर के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास को भी उजागर करती है। ये स्मारक क्षेत्र में 3,000 से अधिक वर्षों से मानव निवास के प्रमाण हैं।
ये स्मारक करिवेलूर के प्राचीन इतिहास की एक खिड़की प्रदान करते हैं, जो छात्रों और इतिहास प्रेमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये स्मारक एक निजी संपत्ति, पेरिकमाना नारायण नंबूथीरी के पूर्वजों की भूमि पर स्थित हैं। नंबूथीरी ने अपने पूर्वजों की विरासत को बचाने के लिए इस संपत्ति को बेचने के कई उच्च-मूल्य प्रस्तावों को ठुकरा दिया है।
ऐतिहासिक संदर्भ
इतिहासकार मुअलीधरण करिवेलूर के अनुसार, इन अवशेषों का ऐतिहासिक महत्व मिस्र के पिरामिडों के समान है। इन्हें विलियम लोगन द्वारा 'मालाबार मैनुअल' में भी वर्णित किया गया था। ये स्थल एडवरमबा से एझुमाला तक मानव सभ्यता के निरंतर विकास की कहानी कहते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कुडाक्कल (छाता पत्थर) क्या हैं?
उत्तर: ये मेगालिथिक काल के समाधि स्मारक हैं जो चार खड़े पत्थरों और एक गुंबददार ऊपरी पत्थर से बने होते हैं।
प्रश्न 2: इन स्मारकों का संरक्षण क्यों जरूरी है?
उत्तर: ये स्मारक 3,000 साल पुराने मानव इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।