तिरुवन्नामलाई के पास उसांमपडी गांव के निवासियों ने बुधवार को चित्तूर-कुड्डालोर राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। उनकी मुख्य मांग है कि सरकारी बसें उनके गांव के बस स्टॉप पर रुकें। इस विरोध प्रदर्शन से छात्र और दैनिक यात्री, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं, काफी प्रभावित हुए हैं।
- तिरुवन्नामलाई के पास उसांमपडी गांव के निवासियों ने सरकारी बस सेवा की मांग को लेकर राजमार्ग अवरुद्ध किया।
- ग्रामीणों का कहना है कि बसें उनके गांव के बजाय दो किलोमीटर दूर स्थित अन्य गांवों में रुकती हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
- छात्रों, कार्यालय जाने वालों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- कई बार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
- पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया और जिला कलेक्टर को उनकी मांगों से अवगत कराने का आश्वासन दिया।
तिरुवन्नामलाई: तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में बुधवार को उसांमपडी गांव के निवासियों ने एक अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चित्तूर-कुड्डालोर राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया और मांग की कि सरकारी बसें उनके गांव के बस स्टॉप पर रुकें। इस प्रदर्शन के कारण सड़क पर यातायात बाधित हो गया और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव का बस स्टॉप कम से कम 15 आसपास के गांवों के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो तिरुवन्नामलाई और किलपेंनथुर कस्बों के बीच लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। वर्तमान में, तिरुवन्नामलाई और तिरुक्कोयिलुर के बीच चलने वाली अधिकांश बसें मल्लावडी और करुंथुवाम्बाडी गांवों में रुकती हैं, जो मुख्य सड़क पर स्थित हैं। उसांमपडी गांव मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर होने के कारण, यहां बहुत कम यात्री बसें पकड़ते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (TNSTC) की अधिकांश बसें इस गांव में रुकती ही नहीं हैं।
समस्या का प्रभाव
इस स्थिति से छात्रों और कार्यालय जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। एस. पेचियाम्मल, जो एक स्थानीय यात्री हैं, ने बताया, "हमें बस पकड़ने के लिए कम से कम दो किलोमीटर पैदल चलकर करुंथुवाम्बाडी तक जाना पड़ता है, जो सबसे नज़दीकी बस स्टॉप है जहाँ सभी बसें रुकती हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि महिलाएं और बुजुर्गों को अक्सर मोटर चालकों से मदद लेनी पड़ती है ताकि वे उन्हें निकटतम बस स्टॉप तक छोड़ सकें।
लिखित शिकायतों के बावजूद उपेक्षा
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (TNSTC) के अधिकारियों और जिला प्रशासन से संपर्क किया है। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक शिकायत निवारण बैठक में भी अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे थे। इसके बावजूद, उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उन्हें विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such public transport accessibility issues are critical for rural development and connectivity. The lack of basic bus services directly impacts education, employment opportunities, and access to essential services for residents in remote areas. This protest highlights a systemic failure to address the needs of underserved communities.
स्थानीय सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, उसांमपडी के निवासियों ने राजमार्ग के एक प्रमुख हिस्से को अवरुद्ध कर दिया। सूचना मिलने पर, स्थानीय पुलिस और राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से छात्रों को शांत कराया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को जिला कलेक्टर वंदना गर्ग के समक्ष रखा जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद, ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक रास्ता खोल दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि तिरुवन्नामलाई और तिरुक्कोयिलुर के बीच चलने वाली सरकारी बसें उसांमपडी गांव के बस स्टॉप पर भी रुकें। - इस विरोध प्रदर्शन का समाधान कैसे किया गया?
पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।