अमेरिकी सेना ने GPS के विकल्प के रूप में ऑस्टिन स्थित स्टार्टअप 'Tern' की तकनीक में $11.26 मिलियन का निवेश किया है। इसे 'युद्धक्षेत्र के लिए गूगल मैप्स' कहा जा रहा है, जो जामिंग के बीच भी सटीक नेविगेशन सुनिश्चित करेगा।
- अमेरिकी सेना ने Tern के साथ $11.26 मिलियन का अनुबंध किया है।
- यह तकनीक GPS के बिना वाहनों को नेविगेट करने में सक्षम बनाती है।
- मिडल ईस्ट और यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में GPS जामिंग के कारण यह कदम उठाया गया है।
- Tern का सिस्टम वाहन के डायग्नोस्टिक्स बोर्ड से डेटा लेकर काम करता है।
अमेरिकी सेना ने नेविगेशन की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ऑस्टिन स्थित स्टार्टअप Tern के साथ $11.26 मिलियन का एक महत्वपूर्ण अनुबंध किया है। यह सौदा सेना को ऐसे नेविगेशन समाधान प्रदान करेगा जो पारंपरिक GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) पर निर्भर नहीं हैं। Tern ने अपनी इस अत्याधुनिक तकनीक को "युद्धक्षेत्र के लिए गूगल मैप्स" के रूप में परिभाषित किया है, जिसका उद्देश्य सैन्य वाहनों को कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता दिखाना है।
यह विकास ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर GPS व्यवधानों में भारी वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से मध्य पूर्व और यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्रों में GPS सिग्नल को जाम करने की घटनाएं आम हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, स्वयं अमेरिकी सेना द्वारा किए गए GPS जैमिंग प्रयोगों के कारण इस साल एक मेडिवैक विमान की घातक दुर्घटना भी हुई थी। इसी जोखिम को देखते हुए, अमेरिकी कांग्रेस और पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दौरान से ही गैर-GPS नेविगेशन तकनीकों के विकास पर जोर दिया जा रहा था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों की लड़ाई नहीं, बल्कि डेटा और सिग्नल की लड़ाई बन गई है। जब दुश्मन GPS सिग्नल को ब्लॉक कर देता है, तो पूरी सेना दिशाहीन हो सकती है। Tern की तकनीक इस 'सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर' को खत्म करती है, जिससे सैन्य संचालन अधिक लचीला और सुरक्षित हो जाता है।
Tern की कार्यप्रणाली काफी अनूठी है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ शॉन मूर के अनुसार, उनका उपकरण वाहन के डायग्नोस्टिक्स बोर्ड से जुड़ता है और एक टैबलेट के माध्यम से सैनिक को इंटरफेस प्रदान करता है। यह सिस्टम वाहन द्वारा उत्पन्न डेटा को "पैसिवली" सुनता है और मालिकाना एल्गोरिदम का उपयोग करके उसे सटीक अक्षांश (latitude) और देशांतर (longitude) में बदल देता है।
"GPS की नाजुकता के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी है; लोग केवल अपने फोन पर नीले बिंदु को देखते हैं और मानते हैं कि वह हमेशा वहां रहेगा।"
इस तकनीक की प्रभावशीलता का प्रमाण तब मिला जब सह-संस्थापक ब्रेट हैरिसन ने ऑस्टिन से लगुना बीच तक 1,300 मील की यात्रा की। जहां पारंपरिक GPS दर्जनों बार विफल हुआ, वहीं Tern की तकनीक ने पूरी यात्रा के दौरान वाहन की स्थिति को सटीक रूप से ट्रैक किया। चूंकि यह एक क्लोज्ड सिस्टम है, इसलिए इसे बाहरी दुश्मनों द्वारा बाधित करना लगभग असंभव है।
ब्रेट हैरिसन, जो स्वयं एक सैन्य अनुभवी हैं और अफगानिस्तान में स्पेशल ऑपरेशंस टास्क फोर्स का हिस्सा रह चुके हैं, का कहना है कि यह तकनीक केवल एक 'साइंस प्रोजेक्ट' नहीं है, बल्कि इसे वास्तविक युद्धक्षेत्र में तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है।
Frequently Asked Questions
1. क्या Tern तकनीक पूरी तरह से GPS की जगह ले लेगी?
नहीं, यह मुख्य रूप से एक लचीले विकल्प और बैकअप के रूप में कार्य करती है ताकि GPS जाम होने पर भी संचालन जारी रहे।
2. यह तकनीक सामान्य कारों में उपलब्ध होगी?
वर्तमान में यह सैन्य अनुबंध के तहत है, लेकिन भविष्य में इसकी नागरिक उपयोग की संभावनाएं हो सकती हैं।