अयोध्या राम मंदिर में दान की राशि के गबन के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है।
- SIT की अंतिम रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई।
- गबन के मामले में FIR में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
- लखनऊ मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में जांच पूरी हुई।
उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। सोमवार (17 अगस्त, 2026) को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अब ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।
इस SIT का गठन 13 जून को राज्य सरकार द्वारा ट्रस्ट के अनुरोध पर किया गया था। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पहले उठाया गया था, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है। तीन सदस्यीय इस पैनल का नेतृत्व लखनऊ मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि रेंज आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार इसके अन्य सदस्य थे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल चोरी का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक विश्वास और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन पर सवाल उठाता है। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर गबन होना न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात है। सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाकर यह संदेश देना चाहती है कि आस्था के केंद्र पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राम मंदिर में दान सुरक्षा की यह विफलता यह दर्शाती है कि मंदिर प्रबंधन में अब डिजिटल और पारदर्शी ऑडिट प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है।
जांच प्रक्रिया काफी तेज रही, जिसमें 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में कई कड़े सुझाव दिए गए थे, जिसके बाद ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन ने श्री राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके परिणामस्वरूप 25 जून को मामला दर्ज (FIR) किया गया।
FIR में आठ मुख्य आरोपियों के नाम शामिल हैं: अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू। इनके अलावा कुछ अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2019 के ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। दुनिया भर से करोड़ों भक्तों द्वारा दिए गए दान की विशाल मात्रा को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन इस घटना ने आंतरिक निगरानी में मौजूद खामियों को उजागर कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SIT जांच का नेतृत्व कौन कर रहा है?
SIT का नेतृत्व लखनऊ मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जिनके साथ रेंज आईजी किरण एस. और विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं।
आरोपियों पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।