भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टायकट ने गौतम बुद्ध नगर में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन किया है। उन्होंने प्रशासन पर किसानों को अधिकारियों से मिलने से रोकने का आरोप लगाया है।

  • राकेश टायकट ने किसानों से आंदोलन जारी रखने और संघर्ष करने का आह्वान किया।
  • किसान विकसित आवासीय भूखंड और बढ़ी हुई मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
  • प्रशासन पर प्रदर्शनों को रोकने और अधिकारियों से मिलने में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टायकट ने सोमवार को प्रदर्शनकारी किसानों के बीच पहुंचकर उनके संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन दिया। टायकट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों के पास 'संघर्ष' के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

टायकट ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA), ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) और नोएडा प्राधिकरण के कार्यालयों के बाहर आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित किया। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा, "यदि किसान अपने स्थानीय प्राधिकरण के कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकते या अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याएं नहीं बता सकते, तो क्या वे बंधक या कैदी हैं?"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शहरीकरण की दौड़ में किसानों के हितों की अनदेखी होने से भविष्य में बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष और सामाजिक अस्थिरता पैदा होने की संभावना है।

"यदि किसान अपने ही अधिकारियों से मिलने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर हैं, तो यह लोकतांत्रिक संवाद की विफलता का संकेत है।"

प्रदर्शनकारी किसानों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • अधिग्रहित भूमि के बदले 10% विकसित 'आबादी' भूखंड।
  • वर्तमान मुआवजे में अतिरिक्त 64% की वृद्धि।
  • आवासीय भूखंडों के उपयोग में अधिक लचीलापन और गांवों में अधिक 'आबादी' भूमि।

राकेश टायकट, जो 2020-21 के किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे हैं, ने कहा कि पहले सरकारें संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने किसानों को प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर डटे रहने और अपनी मांगों के लिए लड़ते रहने का निर्देश दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा दशकों से चला आ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विस्तार के दौरान हजारों एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहित की गई है। किसानों का तर्क है कि उन्हें विकास के बदले केवल विस्थापन मिला है, जबकि मुआवजे की दरें और पुनर्वास की नीतियां अपर्याप्त हैं।

Did You Know?: नोएडा और ग्रेटर नोएडा का विकास भारत के सबसे बड़े शहरी केंद्रों में से एक के रूप में हुआ है, लेकिन इसके पीछे हजारों किसानों की भूमि का बड़ा हिस्सा शामिल है।

Frequently Asked Questions

1. किसान मुख्य रूप से क्या मांग कर रहे हैं?
किसान अधिग्रहित भूमि के बदले विकसित आवासीय भूखंड और मुआवजे में 64% की अतिरिक्त वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

2. राकेश टायकट का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
टायकट ने किसानों के साथ खड़े होने का वादा किया है और कहा है कि प्रशासन की बाधाओं के कारण अब केवल संघर्ष ही समाधान है।