वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल का एल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली रूप ले सकता है। इसके कारण प्रशांत महासागर का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है, जिससे दुनिया भर में चरम मौसम और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ जाएगा।
मुख्य बातें
- एल नीनो के कारण प्रशांत महासागर का तापमान 150 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
- यह प्रभाव 2026 के अंत तक बने रहने और सर्दियों में चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।
- इसके कारण दक्षिणी क्षेत्रों में भारी बारिश और उत्तरी हिस्सों में सूखा व गर्मी बढ़ेगी।
जलवायु वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी जारी की है कि प्रशांत महासागर में एक ऐतिहासिक रूप से शक्तिशाली एल नीनो (El Niño) आकार ले रहा है। बर्कले अर्थ (Berkeley Earth) के विश्लेषण के अनुसार, इस बात की 90% संभावना है कि यह प्राकृतिक जलवायु पैटर्न उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के तापमान को पिछले 150 वर्षों के रिकॉर्ड से भी ऊपर ले जाएगा। तापमान में यह अभूतपूर्व वृद्धि वैश्विक स्तर पर मौसम को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर सकती है और चरम मौसमी घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है।
अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में इसका प्रभाव अलग-अलग होगा। दक्षिणी अमेरिका और खाड़ी देशों में सर्दियों के दौरान भारी बारिश और ठंडे मौसम की उम्मीद है, जबकि उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी और कम बर्फबारी देखी जा सकती है। भारत और एशिया के अन्य हिस्सों में भी इसका सीधा असर मानसून और कृषि चक्र पर पड़ सकता है, जिससे सूखे जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि इस स्तर का एल नीनो वैश्विक कृषि व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, ऊर्जा ग्रिडों पर दबाव बढ़ा सकता है और जंगल की आग (wildfires) के पैटर्न को पूरी तरह बदल सकता है। जेट स्ट्रीम के मजबूत होने से तूफान का मार्ग बदलेगा, जिससे अटलांटिक महासागर में चक्रवातों की संख्या तो कम हो सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बाढ़ और सूखे का संकट बेहद गहरा हो जाएगा।
"वर्तमान रुझान और घटनाक्रम स्पष्ट संकेत देते हैं कि यह एल नीनो 1997-98 और 2015-16 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है, जिन्हें अब तक का सबसे मजबूत माना गया है," - स्टीवन डिमार्टिनो, एएमएस बोर्ड ऑफ डिजिटल मेटियोरोलॉजिस्ट।
एल नीनो का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
एल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर की एक ऐसी स्थिति है जिसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है। यह एक प्राकृतिक चक्र है, लेकिन वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी तीव्रता कई गुना बढ़ गई है। इतिहास में 1997-1998 और 2015-2016 के 'सुपर एल नीनो' ने दुनिया भर में अरबों डॉलर का नुकसान किया था, जिसके कारण कई देशों में भुखमरी, बाढ़ और भीषण सूखा पड़ा था।
| एल नीनो वर्ष | तापमान में वृद्धि (अधिकतम) | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| 1997-1998 | +2.5°C से +2.8°C | कैलिफोर्निया में विनाशकारी बाढ़, दक्षिणी अमेरिका में बवंडर। |
| 2015-2016 | +2.6°C से +2.75°C | वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड गर्मी, एशिया में भीषण सूखा। |
| वर्तमान (अनुमानित) | +3.6°C तक संभावित | चरम मौसमी घटनाएं, सर्दियों में सूखा और रिकॉर्ड गर्मी। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यह एल नीनो कब तक सक्रिय रहेगा?
उत्तर 1: विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, यह एल नीनो प्रभाव 2026 के अंत तक जारी रह सकता है, और इसका सबसे गंभीर असर सर्दियों के महीनों में दिखेगा।
प्रश्न 2: क्या एल नीनो से चक्रवातों का खतरा कम होता है?
उत्तर 2: हां, एक मजबूत एल नीनो के कारण अटलांटिक महासागर में तेज हवाएं चलती हैं, जो चक्रवातों (hurricanes) को बनने से रोकती हैं, हालांकि अन्य क्षेत्रों में तूफान का खतरा बढ़ जाता है।