सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' माना गया था। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए समय मांगा है।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है।
- हाईकोर्ट ने NSE को RTI अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' माना था।
- न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ मामले की सुनवाई करेगी।
- NSE ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSEI) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' घोषित किया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने NSE द्वारा दायर याचिका पर विचार करने की सहमति दे दी है और केंद्रीय सूचना आयोग सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा है।
मामले की पृष्ठभूमि में दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ का निर्णय शामिल है, जिसने NSE की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें एकल न्यायाधीश के अप्रैल 2010 के फैसले को चुनौती दी गई थी। एकल न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था कि NSE, RTI अधिनियम की धारा 2(h) के तहत एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' की श्रेणी में आता है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला वित्तीय पारदर्शिता और कॉर्पोरेट स्वायत्तता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि NSE को 'सार्वजनिक प्राधिकरण' माना जाता है, तो इसका अर्थ है कि नागरिक RTI के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज से विस्तृत जानकारी मांग सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यदि कोई निकाय सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्त पोषण द्वारा संचालित है, तो वह 'सार्वजनिक प्राधिकरण' माना जाएगा।
यह कानूनी लड़ाई तय करेगी कि भारत के प्रमुख वित्तीय संस्थान सूचना के अधिकार के प्रति कितने जवाबदेह हैं।
NSE का तर्क रहा है कि वह एक निजी इकाई है और RTI के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूर्व निर्णय का समर्थन करते हुए कहा था कि NSE पर सरकार का पर्याप्त नियंत्रण है। अब सर्वोच्च न्यायालय इस कानूनी पेच को सुलझाने के लिए चार सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
RTI अधिनियम, 2005 का उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाना है। वर्षों से, कई बड़े संस्थानों के खिलाफ यह बहस चल रही है कि क्या वे 'सार्वजनिक कार्य' करते हैं और क्या उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। NSE का मामला इस बहस का केंद्र बना हुआ है क्योंकि यह देश के सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय बाजारों में से एक का संचालन करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. RTI के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' क्या है?
यह वह संस्था है जो सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या वित्त पोषण में है, और नागरिक इससे जानकारी मांग सकते हैं।
2. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का क्या प्रभाव पड़ेगा?
फिलहाल, NSE को सूचना के अधिकार के तहत तत्काल जवाबदेह बनाने वाला हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।