मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री अनीता राधाकृष्णन के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले को थूथुकुडी से मदुरै स्थानांतरित करने की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से मुकदमे में अनावश्यक देरी होगी जो पहले से ही समापन के करीब है।
मुख्य बिंदु
- मद्रास उच्च न्यायालय ने ED की याचिका को खारिज कर दिया।
- मामला थूथुकुडी में ही चलेगा, मदुरै स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
- अदालत ने कहा कि मुकदमे का चरण समापन के बेहद करीब है।
- PMLA के तहत संयुक्त सुनवाई की शर्तों पर स्पष्टता दी गई।
चेन्नई स्थित मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पूर्व DMK मंत्री अनीता आर. राधाकृष्णन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ चल रहे संपत्ति से अधिक आय (DA) के मामले को थूथुकुडी से मदुरै स्थानांतरित करने की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका को खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले को मदुरै स्थानांतरित करने से मुकदमे की प्रक्रिया में देरी होगी, जो वर्तमान में अपने अंतिम चरण में है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब मदुरै की अदालत ने अभी तक मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेना भी शुरू नहीं किया है, तो संयुक्त सुनवाई का प्रश्न ही नहीं उठता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2001 से 2006 के बीच AIADMK कैबिनेट में मंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान ₹2.68 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने से संबंधित है। भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) द्वारा दर्ज इस मामले में थूथुकुडी सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही है। अब तक 79 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और अभियोजन पक्ष ने अपनी अंतिम बहस भी पूरी कर ली है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय कानूनी प्रक्रियाओं की दक्षता और मुकदमे के समापन की गति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि PMLA की धारा 44(1)(c) का उद्देश्य समय बचाना है, न कि उस मुकदमे को फिर से खोलना जो लगभग समाप्त होने वाला है।
'मुकदमे में देरी, न्याय में देरी है, खासकर तब जब वह अपने अंतिम चरण में हो।' - न्यायिक विश्लेषण
अदालत ने आगे कहा कि ED ने एक साल बाद भी पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनिवार्य मंजूरी प्राप्त नहीं की है। इस निर्णय के साथ ही, अदालत ने थूथुकुडी सत्र न्यायालय में लंबित सुनवाई के खिलाफ अप्रैल 2026 में दिए गए अंतरिम स्थगन को भी हटा दिया है और मामले को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ED मामले को मदुरै क्यों ले जाना चाहती थी?
ED का तर्क था कि भ्रष्टाचार मामले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की संयुक्त सुनवाई मदुरै में होनी चाहिए।
2. अदालत ने याचिका क्यों खारिज की?
अदालत ने कहा कि थूथुकुडी में मामला समाप्त होने वाला है और स्थानांतरण से केवल समय की बर्बादी होगी।