मद्रास उच्च न्यायालय ने अनाइकट्टी की पहाड़ियों में बिना किसी वैधानिक अनुमति के चल रहे आठ निजी रिसॉर्ट्स को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है। यह आदेश हाथियों के संरक्षण और अनियंत्रित निर्माण को रोकने के लिए दायर एक याचिका के बाद आया है।

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने अनाइकट्टी में बिना अनुमति के चल रहे 8 रिसॉर्ट्स को तुरंत बंद करने का आदेश दिया।
  • जांच में पाया गया कि 10 में से केवल 2 रिसॉर्ट्स के पास ही वैध नियोजन अनुमति (Planning Permission) थी।
  • यह मामला हाथियों के संरक्षण और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है।
  • जिला कलेक्टर को नियमों के उल्लंघन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने कोयंबटूर जिले के अनाइकट्टी पहाड़ियों में संचालित आठ निजी रिसॉर्ट्स को तत्काल प्रभाव से बंद करने का कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि इन रिसॉर्ट्स के पास न तो आवश्यक नियोजन अनुमति (Planning Permission) थी और न ही अन्य कोई वैधानिक लाइसेंस या मंजूरी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के सुरक्षित आवास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई

यह कानूनी लड़ाई चेन्नई के निवासी एस. मुरलीधरन द्वारा दायर एक जनहित याचिका के माध्यम से शुरू हुई। याचिका में अनाइकट्टी क्षेत्र में रिसॉर्ट्स के अनियंत्रित विस्तार और उनके कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास पर मंडराते खतरे को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इन रिसॉर्ट्स को विनियमित किया जाए ताकि पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत के निर्देश पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया और पाया कि स्थिति काफी चिंताजनक है।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला भारत के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ते संघर्ष को रेखांकित करता है। अनाइकट्टी जैसे क्षेत्रों में, जहाँ मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक बड़ी चुनौती है, अवैध निर्माण न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा करता है।

अवैध निर्माण और बिना अनुमति के संचालित रिसॉर्ट्स न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करते हैं, बल्कि वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) को भी बाधित करते हैं।

जिला कलेक्टर पावनकुमार जी. गिरियाप्पनवर द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि क्षेत्र में संचालित 10 रिसॉर्ट्स में से केवल दो के पास ही वैध नियोजन अनुमति थी। अदालत ने गौर किया कि जिन दो रिसॉर्ट्स के पास अनुमति थी, उन्हें भी पंचायत प्रशासन की मंजूरी केवल 1 जुलाई, 2026 को ही प्राप्त हुई थी।

भविष्य की कार्रवाई और जांच

अदालत ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इन आठ रिसॉर्ट्स को तुरंत बंद करें और अगली सुनवाई की तारीख तक अदालत को रिपोर्ट सौंपें। इसके अतिरिक्त, समिति को क्षेत्र में अन्य संभावित अवैध रिसॉर्ट्स की पहचान करने के लिए और अधिक गहन निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

क्या आप जानते हैं?: अनाइकट्टी का क्षेत्र पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जो जैव विविधता के मामले में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अदालत ने रिसॉर्ट्स को बंद करने का आदेश क्यों दिया?
क्योंकि जांच में पाया गया कि आठ रिसॉर्ट्स के पास आवश्यक नियोजन अनुमति और वैधानिक लाइसेंस नहीं थे।

2. इस याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य उद्देश्य अनाइकट्टी में रिसॉर्ट्स का नियमन करना और हाथियों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करना था।