ओडिशा उच्च न्यायालय ने रायगड़ा में बॉक्साइट खनन का विरोध कर रहे आदिवासी ग्रामीणों के साथ कथित पुलिसिया अत्याचार की जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रशासन को खनन क्षेत्र के आसपास शांति बनाए रखने का आदेश दिया है।
- ओडिशा हाईकोर्ट ने रायगड़ा जिला प्रशासन से पुलिसिया कथित अत्याचार पर रिपोर्ट मांगी है।
- आदिवासी ग्रामीणों पर UAPA जैसे गंभीर कानून लगाने और घरों में छापेमारी करने का आरोप है।
- अदालत ने खनन स्थल के पास शांति बनाए रखने और हिंसा रोकने के निर्देश दिए हैं।
ओडिशा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए रायगड़ा जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह बॉक्साइट खनन परियोजना का विरोध करने वाले आदिवासी ग्रामीणों के साथ हुई कथित पुलिसिया बर्बरता के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। यह मामला सिजीमली पहाड़ी (Sijimali Hill) के आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा है, जो रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में स्थित है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को आदेश दिया है कि वे खनन स्थल के निकटवर्ती गांवों में शांति सुनिश्चित करें। स्थानीय ग्रामीणों का तर्क है कि बॉक्साइट खनन से उनके जल स्रोत, पारिस्थितिकी और आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला विकास बनाम पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के बीच के पुराने संघर्ष को दर्शाता है। जब औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाता है, तो अक्सर स्थानीय समुदायों के अधिकारों का हनन होता है, जिससे कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
पुलिस द्वारा बिना कारण बताए महिलाओं की गिरफ्तारी और घरों में जबरन घुसना मानवाधिकारों और डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं के वकील अनूप कुमार महापात्र ने अदालत में दलील दी कि 10 मार्च को पुलिस ने कालाहांडी जिले में अंधाधुंध छापेमारी की, जिसमें 21 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं। आरोप है कि ग्रामीणों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत मामले दर्ज किए गए और उन्हें भवानीपटना जेल भेज दिया गया।
मामले में एक अत्यंत संवेदनशील पहलू 19 वर्षीय गर्भवती महिला और अन्य महिलाओं के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का भी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के घरों के दरवाजे तोड़कर तलाशी ली। दूसरी ओर, राज्य के वकील शशांक दास ने तर्क दिया कि पुलिस केवल अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट तामील करने गई थी, लेकिन इस दौरान उन पर हमला हुआ जिससे 58 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ओडिशा का जनजातीय क्षेत्र लंबे समय से खनिज संपदा और आदिवासी अधिकारों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। बॉक्साइट और लौह अयस्क के खनन के लिए अक्सर स्थानीय समुदायों को विस्थापित किया जाता है, जिससे सामाजिक और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है।
Frequently Asked Questions
1. ग्रामीणों ने खनन का विरोध क्यों किया है?
ग्रामीणों का मानना है कि खनन से उनके प्राकृतिक जल स्रोत और पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
2. अदालत ने पुलिस को क्या निर्देश दिए हैं?
अदालत ने पुलिसिया कार्रवाई की जांच रिपोर्ट मांगी है और खनन क्षेत्र के आसपास शांति बनाए रखने का आदेश दिया है।