मैसूर में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिक न्यायाधीश नागराज सिद्दप्पा अंकाशदोड्डी ने युवाओं को नशे के जाल से बचने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नशा न केवल स्वास्थ्य बल्कि अपराध की ओर भी धकेलता है।

  • युवा देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें नशे से सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
  • नशे की लत युवाओं को चोरी और लूट जैसे अपराधों की ओर धकेल सकती है।
  • नशीले पदार्थों की बिक्री और खपत दंडनीय अपराध है।
  • संदिग्ध गतिविधियों की सूचना 1933 हेल्पलाइन पर गोपनीय रूप से दी जा सकती है।

मैसूर: वरिष्ठ नागरिक न्यायाधीश और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव, नागराज सिद्दप्पा अंकाशदोड्डी ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी को नशे और शराब की लत से बचाना अत्यंत आवश्यक है। गुरुवार को मैसूर के ज्ञानोदय प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा देश की असली पूंजी हैं और उन्हें गलत संगत या भ्रामक प्रभावों के कारण नशे का शिकार नहीं होना चाहिए।

यह कार्यक्रम डॉ. महंत शिवयोगी की जयंती के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन, कर्नाटक राज्य शराब निषेध बोर्ड और अन्य सरकारी विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शराब और नशीले पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना था।

नशा और अपराध का गहरा संबंध

अंकाशदोड्डी ने एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशा केवल स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह युवाओं को अपराध की दुनिया में भी धकेल सकता है। जब युवा अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए धन जुटाने में असमर्थ होते हैं, तो वे चोरी, लूटपाट और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने लगते हैं। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सतर्क रहने का आह्वान किया।

नशाखोरी न केवल व्यक्ति के भविष्य को बर्बाद करती है, बल्कि यह समाज में अपराध की दर को भी बढ़ाती है।

हाल ही में मैसूर में लगभग ₹380 करोड़ मूल्य की नशीली दवाओं की बड़ी जब्ती का उल्लेख करते हुए, न्यायाधीश ने जनता से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति अपने आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री या सेवन देखता है, तो तुरंत 1933 हेल्पलाइन पर सूचित करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की विशाल युवा आबादी को देखते हुए, नशा मुक्ति केवल एक स्वास्थ्य मुद्दा नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दा है। यदि युवा शक्ति नशे की गिरफ्त में आती है, तो देश का जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) एक आपदा में बदल सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी अपनी राय साझा की। मनोचिकित्सक डॉ. मंजूश्री ने बताया कि नशा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को तहस-नहस कर देता है, जिससे अवसाद और मानसिक अस्थिरता पैदा होती है। वहीं, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक विनोद चंद्रा ने बताया कि डॉ. महंत शिवयोगी के प्रयासों को याद करते हुए इस दिन को 'नशा मुक्त दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है।

Did You Know?: कर्नाटक में नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए विशेष प्रवर्तन एजेंसियां और 1933 हेल्पलाइन नंबर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नशीले पदार्थों की संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट कैसे करें?
उत्तर: आप 1933 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी दे सकते हैं, जहाँ आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

प्रश्न 2: नशा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: नशा अवसाद (depression), मानसिक अस्थिरता और व्यवहारिक परिवर्तन का कारण बन सकता है।