सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने मतदाता जोड़ने और हटाने से संबंधित अपीलों के सटीक आंकड़ों की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने वाली अपीलों का अलग-अलग डेटा देने का आदेश दिया है।
- 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में लगभग 38 लाख अपीलें लंबित होने का दावा किया गया है।
- कोर्ट ने कहा कि वंचित मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी अपीलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी नगर पालिका चुनावों के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में नाम शामिल करने की मांग करने वाली कितनी अपीलें हैं और कितने मतदाताओं को सूची से बाहर करने की मांग की जा रही है। न्यायालय का उद्देश्य यह समझना है कि क्या अपीलों का स्वरूप निष्पक्ष है या यह किसी विशेष उद्देश्य से किया जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर चुनावी अखंडता को खतरे में डाल सकता है। यदि लाखों मतदाताओं को बिना उचित प्रक्रिया के बाहर कर दिया जाता है, तो यह सीधे तौर पर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में, यह मामला आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
वंचित मतदाताओं को पुन: शामिल करने की अपीलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि उनका निष्कासन उन्हें उनके मतदान के अधिकार से वंचित करता है।
मामले की सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि 19 न्यायाधिकरणों में लगभग 38 लाख अपीलें दर्ज हैं, जिनमें से केवल 7 लाख अपीलें मतदाताओं द्वारा नाम जोड़ने के लिए की गई हैं। शेष 31 लाख अपीलें कथित तौर पर चुनाव आयोग या अन्य आप्तिकारियों द्वारा मतदाताओं को सूची से बाहर करने के उद्देश्य से की गई हैं।
न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ये आंकड़े सही हैं, तो मतदाताओं को हटाने के लिए की गई 31 लाख अपीलें एक "बहुत बड़ा हिस्सा" हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि डेटा की समीक्षा के बाद आवश्यक हुआ, तो अधिक न्यायाधिकरणों का गठन किया जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया अपनाई गई है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है, लेकिन अपीलों की भारी संख्या और उनकी प्रकृति ने कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
Frequently Asked Questions
1. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से क्या मांगा है?
कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित अपीलों का विस्तृत और अलग-अलग डेटा मांगा है।
2. पश्चिम बंगाल में कुल कितनी अपीलें लंबित हैं?
अधिवक्ताओं के अनुसार, लगभग 38 लाख अपीलें 19 न्यायाधिकरणों में लंबित या प्रक्रियाधीन हैं।