तेलंगाना उच्च न्यायालय ने वारंगल में लिडेला राजू की संदिग्ध मौत के मामले में ओसमानिया जनरल अस्पताल (OGH) के फोरेंसिक विशेषज्ञों से नया मेडिकल ओपिनियन मांगा है। अदालत ने पुलिस को मामले की दोबारा गहन जांच करने का निर्देश दिया है।

  • न्यायाधीश टी. माधवी देवी ने वारंगल पुलिस को ओजीएच फोरेंसिक विभाग से नई राय लेने का निर्देश दिया।
  • मृतक लिडेला राजू की मौत को लेकर पहले 'कार्डियक अरेस्ट' की रिपोर्ट दी गई थी, जिसे चुनौती दी गई है।
  • अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण अपर्याप्त था।
  • एक अन्य मामले में, राजीव राहदारी एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण पर रोक लगा दी गई है।

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने वारंगल में लिडेला राजू की संदिग्ध मृत्यु के मामले में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। न्यायमूर्ति टी. माधवी देवी ने वारंगल पुलिस को निर्देश दिया है कि वे ओसमानिया जनरल अस्पताल (OGH) के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख से मृत्यु के वास्तविक कारणों पर एक नया और विस्तृत चिकित्सा मत प्राप्त करें।

यह मामला तब गरमाया जब राजू की पत्नी, प्रियंका ने एक रिट याचिका दायर की। याचिका में काकतीय मेडिकल कॉलेज के एक सहायक प्रोफेसर द्वारा दी गई उस राय को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि राजू की मृत्यु 'कार्डियक अरेस्ट' के कारण हुई थी। मृतक के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए थे, जिससे परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला न्याय प्रणाली में फोरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता और पुलिस जांच की गहराई पर सवाल उठाता है। यदि प्रारंभिक चिकित्सा रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है, तो यह न केवल अपराधी को बचने का मौका देती है बल्कि पीड़ित परिवार के साथ अन्याय भी करती है। अदालत का यह निर्णय यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि संदिग्ध मौतों की जांच केवल सतही स्तर पर न होकर वैज्ञानिक रूप से सटीक हो।

फोरेंसिक साक्ष्यों में विसंगतियां अक्सर गंभीर आपराधिक मामलों में न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं।

न्यायाधीश ने यह भी गौर किया कि पार्कल सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) द्वारा मांगे गए सवालों का पुलिस ने बिंदुवार (point-wise) स्पष्टीकरण नहीं दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ओजीएच फोरेंसिक विभाग को मामले से संबंधित सभी सामग्रियों का सूक्ष्मता से परीक्षण करना चाहिए और एक ठोस रिपोर्ट सौंपनी चाहिए।

भूमि अधिग्रहण पर भी बड़ी कार्रवाई

इसी सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति के. सरथ कुमार ने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने राजीव राहदारी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के लिए नौ व्यक्तियों की संपत्तियों के अधिग्रहण की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अधिग्रहण 'भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम-2013' का उल्लंघन करता है।

Did You Know?: फोरेंसिक मेडिसिन वह विज्ञान है जो मृत्यु के कारणों और समय का निर्धारण करने के लिए चिकित्सा और कानूनी सिद्धांतों का उपयोग करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अदालत ने ओजीएच फोरेंसिक डॉक्टरों को क्या निर्देश दिया है?
उत्तर: अदालत ने उन्हें लिडेला राजू की मृत्यु के कारणों की गहन जांच करने और विस्तृत चिकित्सा राय प्रदान करने का निर्देश दिया है।

प्रश्न 2: राजीव राहदारी कॉरिडोर मामले में क्या हुआ?
उत्तर: उच्च न्यायालय ने इस कॉरिडोर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है।