दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबी हिरासत और धीमी न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए एनआईए के जम्मू-कश्मीर आतंकी साजिश मामले में सोबिया अज़ीज़ और कामरान अशरफ रेशी को जमानत दे दी है।
- आरोपी सोबिया अज़ीज़ और कामरान अशरफ रेशी अक्टूबर 2021 से हिरासत में थे।
- अदालत ने पाया कि 359 गवाहों में से केवल 21 का ही परीक्षण किया गया है।
- जमानत की शर्त के रूप में आरोपियों को अपने पासपोर्ट जमा करने होंगे।
- न्यायालय ने कहा कि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांचे जा रहे जम्मू और कश्मीर आतंकी साजिश मामले में दो आरोपियों, सोबिया अज़ीज़ और कामरान अशरफ रेशी को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने यह आदेश लंबी हिरासत और मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए पारित किया।
न्यायिक देरी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि मामले में कुल 359 अभियोजन गवाहों में से अब तक केवल 21 गवाहों का ही परीक्षण किया जा सका है। खंडपीठ ने टिप्पणी की, "इस बात को देखते हुए कि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है, आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।"
सोबिया अज़ीज़ के मामले में, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी गतिविधियों में सहायता करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं। हालांकि, अदालत ने माना कि उनके पास जमानत के लिए एक तर्कसंगत आधार है, विशेष रूप से उनकी स्वास्थ्य स्थिति और महिला होने के नाते उनके लंबे समय तक जेल में रहने के कारण।
कामरान अशरफ रेशी का मामला
कामरान अशरफ रेशी, जिन्हें अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था, उस समय केवल 21 वर्ष के थे। एनआईए ने उन पर कट्टरपंथी व्याख्यान में शामिल होने और उनके पास से संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद होने का आरोप लगाया था। अदालत ने पाया कि उनकी लंबी हिरासत और लगाए गए आरोपों की तुलना में जमानत देना न्यायसंगत है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में 'त्वरित सुनवाई' (Speedy Trial) के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। जब तक मुकदमे की प्रक्रिया सुव्यवस्थित नहीं होती, तब तक लंबी हिरासत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन मानी जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गवाहों के परीक्षण में अत्यधिक देरी अभियुक्तों के मौलिक अधिकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
Frequently Asked Questions
1. आरोपियों को किन शर्तों पर जमानत दी गई है?
आरोपियों को अपने पासपोर्ट जमा करने होंगे और बिना अदालत की अनुमति के देश नहीं छोड़ सकते।
2. एनआईए का मुख्य आरोप क्या था?
एनआईए का आरोप था कि आरोपी जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और भारत विरोधी साजिश में शामिल थे।