दिल्ली उच्च न्यायालय ने संविदात्मक सीवर कर्मचारियों को स्थायी करने की याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को नोटिस जारी किया है। याचिका में काम के दौरान हुई मौतों और श्रमिकों के शोषण का गंभीर मुद्दा उठाया गया है।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को नोटिस जारी किया है।
- याचिका में 2,000 संविदात्मक सीवर कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की गई है।
- पिछले 10 वर्षों में ड्यूटी के दौरान 300 सीवर कर्मचारियों की मौत का दावा किया गया है।
- मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे और अनुकंपा नियुक्ति की मांग भी शामिल है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से उनकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह याचिका सीवर सफाई के काम में लगे हजारों संविदात्मक कर्मचारियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी बनाने की मांग करती है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने 'दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच' द्वारा दायर इस याचिका पर अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ये कर्मचारी समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं, जिन्हें बिना किसी सेवा सुरक्षा या वैधानिक लाभों के काम पर रखा गया है।
खतरनाक कार्य और शोषण के आरोप
याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि ये कर्मचारी 'अत्यधिक खतरनाक कर्तव्यों' का पालन करते हैं, जो उनके जीवन, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। याचिका के अनुसार, इनकी कार्य स्थितियाँ 'बंधुआ मजदूरी' से भी बदतर हैं।
आंकड़ों का हवाला देते हुए याचिका में बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में दिल्ली में ड्यूटी के दौरान 300 सीवर कर्मचारी अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद, इन श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जा रहा है और उन्हें भविष्य निधि (PF) या ग्रेच्युटी जैसे लाभों से वंचित रखा गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल श्रम अधिकारों का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सार्वजनिक सुरक्षा का भी है। यदि दिल्ली जल बोर्ड इन कर्मचारियों को नियमित नहीं करता है, तो यह न केवल कानूनी चुनौती होगी बल्कि शहरी स्वच्छता प्रणाली की नैतिक विफलता भी मानी जाएगी।
सीवर कर्मचारियों का नियमितीकरण और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना केवल एक कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक मानवीय अनिवार्यता है।
याचिका में विशेष रूप से उन 2,000 कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है जो पिछले 10 से 25 वर्षों से लगातार दिल्ली जल बोर्ड में संविदा पर काम कर रहे हैं और जिनका सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
इसके अतिरिक्त, याचिका में मांग की गई है कि प्रत्येक मृतक सीवर या सेप्टिक टैंक कर्मचारी के परिवार को कम से कम ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए और उनके एक आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
Frequently Asked Questions
1. यह याचिका किसके द्वारा दायर की गई है?
यह याचिका 'दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच' द्वारा दायर की गई है।
2. न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए क्या तिथि तय की है?
मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित की गई है।