दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश के बाद महिलाओं को उनके पुराने पद और समान वेतन पर लौटने का अधिकार है। साथ ही, पहलवान विनेश फोगाट ने महिला एथलीटों के लिए भी समान अधिकारों की मांग की है।

  • मातृत्व अवकाश के बाद महिला को उसी पद या समकक्ष पद पर वापस मिलना चाहिए।
  • वेतन, वरिष्ठता और पदोन्नति के अवसरों में कोई कटौती नहीं की जा सकती।
  • बिना ठोस कारण के पद बदलना भेदभावपूर्ण माना जाएगा।
  • विनेश फोगाट ने महिला एथलीटों के लिए भी विशेष नीति की मांग की है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को मजबूती प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से लौटने वाली महिला कर्मचारी को उसके पुराने पद पर बहाल किया जाना चाहिए, या कम से कम उसे समान वेतन, स्थिति और जिम्मेदारियों वाला पद दिया जाना चाहिए।

यह मामला एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट से संबंधित था, जिन्हें मातृत्व अवकाश के बाद उनकी मूल भूमिका (Managerial Accounting) से हटाकर ट्रेजरी विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह उनके करियर के साथ समझौता और गर्भावस्था के आधार पर किया गया भेदभाव है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय कार्यस्थल पर लैंगिक समानता की दिशा में एक मील का पत्थर है। अक्सर कंपनियां मातृत्व अवकाश के बाद महिलाओं को 'कम महत्वपूर्ण' भूमिकाओं में डाल देती हैं, जिससे उनके करियर की प्रगति रुक जाती है। अदालत का यह रुख सुनिश्चित करता है कि मातृत्व को करियर की बाधा नहीं बनाया जा सकता।

मातृत्व अवकाश के दौरान सेवा की शर्तों में बदलाव करना कानूनन गलत है और इसे भेदभाव के रूप में देखा जाना चाहिए।

अदालत ने मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी नियोक्ता महिला की सेवा की शर्तों को उसकी हानि के लिए नहीं बदल सकता। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने नियोक्ता को याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये का मुआवजा और 1.5 लाख रुपये का खर्च देने का निर्देश दिया।

विनेश फोगाट की मांग और खेल जगत

कानूनी सुरक्षा का यह मुद्दा अब खेल के मैदान तक भी पहुंच गया है। प्रसिद्ध पहलवान विनेश फोगाट ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र सरकार, भारतीय कुश्ती संघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ से महिला एथलीटों के लिए एक संरचित ढांचा बनाने की मांग की गई है।

विनेश फोगाट का तर्क है कि गर्भावस्था के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी करने वाली महिला एथलीटों को विशेष समर्थन और नीतियों की आवश्यकता होती है ताकि उनका खेल करियर बाधित न हो।

Did You Know?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 42 सरकार को मातृत्व राहत के लिए उपयुक्त प्रावधान बनाने का निर्देश देता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या कंपनी मातृत्व अवकाश के बाद मेरा पद बदल सकती है?
कानूनी रूप से, यदि पद का बदलना आपकी जिम्मेदारियों या वेतन को कम करता है, तो इसे भेदभावपूर्ण माना जा सकता है।

2. विनेश फोगाट की याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उनकी याचिका महिला एथलीटों को मातृत्व के बाद खेल में वापस आने के लिए एक सहायक ढांचा प्रदान करने के बारे में है।