इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि कानून छात्रा की एनएसए के तहत हिरासत 'उपहास के योग्य' थी। अदालत ने डीएम के वेतन से 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानून छात्रा अकृति चौधरी की एनएसए हिरासत को अवैध घोषित कर दिया।
- अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के आचरण को 'उपहास के योग्य' बताया।
- डीएम के वेतन से छात्रा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
- अदालत ने कहा कि डीएम ने छात्र को 'मिसाल बनाने' के लिए अधिकारों का हनन किया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के विरुद्ध एक ऐतिहासिक और सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने एक 25 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय की कानून छात्रा, अकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने इस मामले में कहा कि जिला मजिस्ट्रेट का आचरण 'उपहास के योग्य' (worthy of derision) था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद अप्रैल 2024 में नोएडा में हुए एक श्रमिक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। औद्योगिक और संविदात्मक श्रमिकों ने वेतन वृद्धि और हरियाणा के समान मजदूरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि अकृति चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी और आगजनी के लिए उकसाया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि पुलिस का यह दावा एक 'गढ़ी हुई कहानी' (concocted story) मात्र थी और इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
BozokMedia विश्लेषण: सत्ता का दुरुपयोग
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला मजिस्ट्रेट का कर्तव्य था कि वे रिकॉर्ड की गहन जांच करें, न कि बिना सोचे-समझे दमनकारी कानूनों का सहारा लें। अदालत ने टिप्पणी की कि डीएम का उद्देश्य छात्रा को एक ऐसी 'मिसाल' बनाना था जिससे अन्य लोग सार्वजनिक स्थानों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करने से डरें।
"अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का काम नागरिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें कुचलना।"
अदालत ने पाया कि अकृति चौधरी को हिंसा भड़कने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस द्वारा दावा किए गए इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो साक्ष्य भी अदालत के समक्ष पेश नहीं किए जा सके। न्यायमूर्ति श्रीधरन ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि बिना किसी कारण बताओ नोटिस के इतनी कठोर कार्रवाई क्यों की गई।
ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी महत्व
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का उपयोग अक्सर उन मामलों में किया जाता है जहां राज्य की सुरक्षा को खतरा हो। लेकिन, इस मामले में अदालत ने रेखांकित किया कि एक छात्रा, जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसके खिलाफ इस कानून का प्रयोग करना पूरी तरह से अनुचित था। यह निर्णय भविष्य के लिए एक मिसाल बनेगा कि कैसे अधिकारी बिना 'मस्तिष्क के प्रयोग' (without application of mind) के निर्णय नहीं ले सकते।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को क्या सजा सुनाई?
अदालत ने डीएम के वेतन से 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है क्योंकि उन्होंने अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया है।
2. अकृति चौधरी को किस आधार पर गिरफ्तार किया गया था?
उन्हें नोएडा में हुए श्रमिक विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी और आगजनी के लिए उकसाने के आरोप में एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।