तेलंगाना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा के नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती; यह अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष का है। कोर्ट ने महिला विधायकों के साथ पुलिस के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

  • हाई कोर्ट ने पुलिस को विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोकने का आदेश दिया है।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास है।
  • महिला विधायकों के साथ पुलिस के व्यवहार पर न्यायमूर्ति टी. माधवी देवी ने कड़ी आपत्ति जताई।
  • DGP को दोषी अधिकारियों की पहचान करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विधानसभा के नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति टी. माधवी देवी की एकल पीठ ने कहा कि यदि विधानसभा के नियमों का कोई उल्लंघन होता है, तो कार्रवाई करने का अधिकार केवल स्पीकर (अध्यक्ष) का है, न कि पुलिस का।

यह आदेश बीआरएस (BRS) विधायक तलासानी श्रीनिवास यादव द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने बिना किसी कानूनी अधिकार के उनके विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से रोका। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे विधायकों को विधानसभा के आठवें सत्र में प्रवेश करने से न रोकें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच की सीमा रेखा को परिभाषित करता है। यदि पुलिस विधायकों के प्रवेश को नियंत्रित करने लगती है, तो यह विधायी स्वायत्तता के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है। कोर्ट का यह रुख सुनिश्चित करता है कि विधायी अनुशासन का प्रबंधन सदन के भीतर ही किया जाए, न कि बाहरी सुरक्षा बलों द्वारा।

पुलिस को अति-सक्रिय (hyper) होकर इस तरह का व्यवहार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेषकर महिला विधायकों के साथ।

सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील ने तर्क दिया कि विधानसभा की कार्यप्रणाली के नियम 316 के तहत, कोई भी विधायक सदन में किसी भी प्रकार के बैज या नारे वाले कपड़े नहीं पहन सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस ने शायद इसलिए रोका क्योंकि विधायक काले टी-शर्ट और नारे पहने हुए थे।

हालांकि, न्यायमूर्ति माधवी देवी ने इन तर्कों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि महिला विधायकों को जिस तरह से रोका गया, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं और पुलिस का व्यवहार मर्यादित होना चाहिए।

ऐतिहासिक संदर्भ

संसदीय लोकतंत्र में, सदन की कार्यवाही और उसके अनुशासन को बनाए रखने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सदन के अध्यक्ष की होती है। पुलिस का कार्य केवल बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अतीत में भी कई राज्यों में विधायकों और पुलिस के बीच टकराव की घटनाएं देखी गई हैं, जिसने विधायी मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान के तहत, विधानसभा के भीतर की कार्यवाही की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की शक्ति सदन के अध्यक्ष के पास निहित होती है, न कि राज्य सरकार की पुलिस के पास।

Frequently Asked Questions

1. क्या पुलिस विधानसभा के भीतर नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई कर सकती है?
नहीं, हाई कोर्ट के अनुसार, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास है।

2. कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के बारे में क्या निर्देश दिया है?
कोर्ट ने DGP को दोषी पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।