पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट की अनुपस्थिति को एक 'गंभीर मुद्दा' बताया है। अदालत ने केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से जल्द से जल्द अदालत स्थापित करने का निर्देश दिया है।

मुख्य बातें

  • चंडीगढ़ में पिछले 9 वर्षों से फैमिली कोर्ट की स्थापना लंबित है।
  • हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और UT प्रशासन को जवाब देने का निर्देश दिया है।
  • वर्तमान में पारिवारिक विवादों को नियमित सिविल कोर्टों में निपटाया जा रहा है।
  • याचिका में कहा गया है कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चंडीगढ़ में एक समर्पित फैमिली कोर्ट (परिवार न्यायालय) का न होना एक 'गंभीर मुद्दा' है।

एक खंडपीठ, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर शामिल थे, ने इस मामले में भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है। अदालत ने प्रशासन से अपेक्षा की है कि अगली सुनवाई, जो 2 सितंबर को निर्धारित है, तब तक अदालत की स्थापना के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चंडीगढ़ जैसे विकसित शहर में बुनियादी न्यायिक सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। फैमिली कोर्ट न होने के कारण, नागरिकों को अपने संवेदनशील पारिवारिक विवादों को नियमित सिविल कोर्टों में ले जाना पड़ता है, जहाँ प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। यह न केवल न्याय में देरी करता है, बल्कि पीड़ित पक्षों के मानसिक तनाव को भी बढ़ाता है।

पारिवारिक विवादों के लिए विशेष अदालतों का अभाव न्याय तक पहुंच के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता, एडवोकेट कंवर पहल सिंह के माध्यम से दायर इस PIL में कहा गया है कि 2017 में उच्च न्यायालय की मंजूरी के बावजूद, नौ साल बीत जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है। RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में एक ही न्यायिक अधिकारी को कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के समक्ष लंबित पारिवारिक मामलों को देखना पड़ रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

संसद ने फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 के माध्यम से पारिवारिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान किया था। संविधान का अनुच्छेद 256 सरकारों पर यह कर्तव्य डालता है कि वे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करें। चंडीगढ़ के मामले में, हाईकोर्ट ने 2017 से ही प्रशासन को बार-बार इस दिशा में कदम उठाने के लिए पत्र लिखे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

क्या आप जानते हैं?: चंडीगढ़ को 'द सिटी ब्यूटीफुल' कहा जाता है, लेकिन न्यायिक बुनियादी ढांचे के मामले में यह कई अन्य शहरों से पीछे है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. चंडीगढ़ में वर्तमान में पारिवारिक मामले कैसे सुलझाए जा रहे हैं?
वर्तमान में, पारिवारिक विवादों को नियमित सिविल कोर्टों में निपटाया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है।

2. हाईकोर्ट ने प्रशासन को क्या निर्देश दिया है?
हाईकोर्ट ने केंद्र और UT प्रशासन को जल्द से जल्द फैमिली कोर्ट स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।