मद्रास उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक कार्यक्रमों में राज्य गानों के गायन का क्रम तय करना पूरी तरह से राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर है। केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्यों को स्वायत्तता प्रदान की है।

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य गीतों के गायन के क्रम पर राज्यों के अधिकार को बरकरार रखा है।
  • केंद्र सरकार (MHA) ने स्पष्ट किया है कि राज्यों के पास अपना निर्णय लेने की पूर्ण स्वायत्तता है।
  • तमिलनाडु सरकार ने 'तमिल ताई वालथु' को पहले गाने का आदेश जारी कर दिया है।

मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान राज्य गीतों के गायन का क्रम निर्धारित करने का अधिकार पूरी तरह से राज्य सरकारों के पास है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरगन की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया।

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा था, जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 'तमिल ताई वालथु' को राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के बाद तीसरे स्थान पर रखे जाने पर आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि गीतों के इस क्रम से राज्य गीत की गरिमा कम होती है और यह संघीय ढांचे का उल्लंघन है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के बीच के संबंधों के अलावा, क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े राज्य गीतों का प्रबंधन राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह निर्णय राज्यों को उनकी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

राज्य गीतों का क्रम तय करना राज्यों की सांस्कृतिक संप्रभुता और संघीय अधिकारों का हिस्सा है।

सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के वरिष्ठ पैनल वकील ए. कुमारगुरु ने अदालत को सूचित किया कि गृह मंत्रालय (MHA) ने 9 जुलाई, 2026 को एक संशोधित सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के अनुसार, जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान एक साथ बजाए जाने हों, तो राष्ट्रीय गीत को पहले बजाया जाना चाहिए, लेकिन राज्य गीतों के स्थान के संबंध में कोई सख्त निर्देश नहीं है।

तमिलनाडु सरकार ने भी इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 अगस्त, 2026 को एक सरकारी आदेश (G.O.) जारी किया। इस आदेश के माध्यम से यह पुन: पुष्टि की गई है कि शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्य गीत 'तमिल ताई वालथु' को सबसे पहले गाया जाएगा।

अदालत ने अंततः याचिका को निष्प्रभावी (infructuous) मानते हुए खारिज कर दिया, क्योंकि केंद्र के नए निर्देशों ने विवाद की जड़ को ही समाप्त कर दिया था। याचिकाकर्ता अनन्या राधाकृष्णन ने तर्क दिया था कि गीतों के क्रम में बदलाव अनुच्छेद 29(1) के तहत गारंटीकृत सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन नए सर्कुलर ने राज्यों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता देकर इस विवाद को सुलझा दिया है।

Frequently Asked Questions

1. क्या केंद्र सरकार ने राज्य गीत को अंतिम स्थान पर रखने का आदेश दिया था?
नहीं, केंद्र सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। संशोधित सर्कुलर ने केवल यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें स्वयं तय कर सकती हैं कि उनके राज्य गीत को कब गाया जाएगा।

2. तमिलनाडु सरकार ने इस पर क्या कदम उठाया है?
तमिलनाडु सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी कर यह सुनिश्चित किया है कि राज्य गीत 'तमिल ताई वालथु' को सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जाए।

Did You Know?: भारत के संविधान का अनुच्छेद 29(1) अल्पसंख्यकों और विभिन्न समूहों को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है।