बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (ABC) कार्यक्रम को आक्रामक तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि नसबंदी के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को रोककर ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
मुख्य बातें
- हाई कोर्ट ने सरकार को नसबंदी कार्यक्रम (ABC) को 'आक्रामक' रूप से लागू करने की सलाह दी।
- अदालत का मानना है कि यदि जनसंख्या वृद्धि रुक जाती है, तो आवारा कुत्तों की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
- सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के बाद यह सुओ मोटो याचिका सुनवाई के लिए लाई गई है।
- नसबंदी के साथ-साथ रेबीज नियंत्रण पर भी ध्यान देना अनिवार्य है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि राज्य में आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान करने के लिए 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (ABC) कार्यक्रम को अत्यधिक सक्रियता के साथ लागू किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कुत्तों की आबादी का बढ़ना रोक दिया जाता है, तो इससे जुड़ी अन्य जटिलताएं भी स्वतः ही कम हो जाएंगी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे ने राज्य के वकील से कहा, "प्रशासन को यह समझना होगा कि यदि आप नसबंदी कार्यक्रम को आक्रामक रूप से लागू करते हैं, तो कुत्तों की आबादी नहीं बढ़ेगी। हर वह कुत्ता जो नसबंदी के माध्यम से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनता है, वह प्रजनन नहीं कर पाएगा।" अदालत ने जोर देकर कहा कि कुत्तों को पकड़ने के बजाय, वयस्क कुत्तों को लक्षित करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे नसबंदी के दायरे में आएं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आवारा कुत्तों से होने वाले हमले और रेबीज का खतरा शहरी क्षेत्रों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यदि सरकार केवल कुत्तों को पकड़ने पर ध्यान केंद्रित करती है और नसबंदी की प्रक्रिया को नजरअंदाज करती है, तो समस्या कभी खत्म नहीं होगी। जनसंख्या नियंत्रण ही एकमात्र दीर्घकालिक समाधान है।
"यदि आप कुत्तों के जन्म को रोक देते हैं, तो आप बीमारी को जड़ से खत्म कर रहे हैं। यदि वृद्धि रुक जाती है, तो बाकी चीजें अपने आप व्यवस्थित हो जाएंगी।" - बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2025 के उस ऐतिहासिक निर्णय के बाद सुनवाई के लिए आया है, जिसमें आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़ी सभी चुनौतियों को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि राज्य नागरिकों को कुत्तों के हमलों के खतरे के सामने 'निष्क्रिय दर्शक' बनकर नहीं रह सकता।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में आवारा कुत्तों का मुद्दा दशकों से कानूनी और सामाजिक बहस का विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में बार-बार निर्देश दिए हैं कि पशु कल्याण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जाए। ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम का उद्देश्य कुत्तों को हटाया नहीं, बल्कि उनकी आबादी को नियंत्रित करना है ताकि वे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बने रहें लेकिन खतरा न बनें।
Frequently Asked Questions
1. ABC कार्यक्रम क्या है?
ABC का अर्थ है 'एनिमल बर्थ कंट्रोल', जो कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के माध्यम से उनकी आबादी को नियंत्रित करने की एक वैज्ञानिक विधि है।
2. हाई कोर्ट ने सरकार को क्या विशेष निर्देश दिए?
कोर्ट ने सरकार को केवल कुत्तों को पकड़ने के बजाय वयस्क कुत्तों की नसबंदी सुनिश्चित करने और रेबीज को रोकने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।