इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील सीसीटीवी फुटेज को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सीधे साझा नहीं किया जा सकता। आवेदक केवल सक्षम न्यायालय के माध्यम से इसे सुरक्षित रखने की मांग कर सकते हैं।

  • संवेदनशील सीसीटीवी फुटेज RTI के तहत सीधे साझा करने से प्रतिबंधित है।
  • RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
  • फुटेज प्राप्त करने के लिए सक्षम न्यायालय या आयोग के पास जाना होगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई संवेदनशील सीसीटीवी फुटेज को आवेदक को सीधे नहीं सौंपा जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि फुटेज में ऐसी जानकारी है जो गोपनीयता या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है, तो उसे कानून के तहत छूट दी जा सकती है।

कानूनी आधार और धारा 8(1)(g)

न्यायालय की लखनऊ पीठ ने तर्क दिया कि संवेदनशील फुटेज को RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत संरक्षित किया जा सकता है। यह धारा उन सूचनाओं को प्रकट करने से रोकती है जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा या जीवन को खतरा हो सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान, राज्य सूचना आयोग ने भी अदालत को सूचित किया कि फुटेज में संवेदनशील डेटा शामिल है, जिसे सीधे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला शोभित कश्यप द्वारा दायर एक रिट याचिका से संबंधित है। कश्यप ने मार्च 2025 में एक RTI आवेदन दायर किया था, जिसमें उन्होंने पूर्ण सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी। उन्होंने सूचना न देने के लिए संबंधित अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने और मुआवजे की भी मांग की थी। कश्यप ने तर्क दिया कि सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण करना एक नागरिक का अधिकार है, जिसके लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया।

न्यायालय का समाधान: वैकल्पिक मार्ग

न्यायाधीश शेखर बी एस सारफ और अभdesh कुमार चौधरी की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि RTI के माध्यम से सीधे फुटेज नहीं मिल सकता, लेकिन आवेदक के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं। यदि कोई व्यक्ति फुटेज को सुरक्षित रखना चाहता है, तो वह एक उपयुक्त न्यायालय या सक्षम आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय गोपनीयता और पारदर्शिता के बीच एक बारीक संतुलन स्थापित करता है। जहाँ एक ओर RTI नागरिकों को सशक्त बनाता है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी राज्य की जिम्मेदारी है। यह फैसला भविष्य में डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता के मामलों में एक मिसाल बनेगा।

संवेदनशील डेटा की सुरक्षा और सूचना के अधिकार के बीच का संघर्ष अब न्यायिक स्पष्टता के साथ सुलझ गया है।
Did You Know?: RTI अधिनियम की धारा 8 के तहत सरकार कुछ विशिष्ट सूचनाओं को सार्वजनिक करने से मना कर सकती है यदि वे देश की सुरक्षा या व्यक्तिगत गोपनीयता से जुड़ी हों।

Frequently Asked Questions

1. क्या मैं RTI के माध्यम से किसी भी सीसीटीवी फुटेज की मांग कर सकता हूँ?
नहीं, यदि फुटेज संवेदनशील है और धारा 8(1)(g) के अंतर्गत आता है, तो इसे सीधे नहीं दिया जा सकता।

2. यदि मुझे फुटेज चाहिए, तो सही तरीका क्या है?
आपको एक सक्षम न्यायालय या आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करनी चाहिए, जो फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दे सकता है।