तमिलनाडु के रामनाथपुरम के किसानों ने कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ने की परियोजना के लिए सरकार से 2,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की है। किसानों का मानना है कि वर्तमान 150 करोड़ रुपये का बजट परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए अपर्याप्त है।

  • किसानों ने कावेरी-वैगई-गुंडार परियोजना के लिए 2,000 करोड़ रुपये की मांग की है।
  • वर्तमान में आवंटित 150 करोड़ रुपये को परियोजना के लिए अपर्याप्त बताया गया है।
  • जिला कलेक्टर ने 'कारुवेलम' पेड़ों को काटने और टैंकों की सफाई के कार्यों पर अपडेट दिया।
  • 3,000 हेक्टेयर भूमि के नुकसान के लिए मुआवजे का इंतजार है।

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के किसानों ने राज्य सरकार से कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹2,000 करोड़ का विशेष बजट आवंटित करने की मांग की है। शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक जनसुनवाई बैठक के दौरान, विभिन्न किसान संघों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया और अपनी मांगों की प्रति जिला कलेक्टर एम. शिवगुरु प्रभाकरन को सौंपी।

किसानों का तर्क है कि हालांकि सरकार ने वर्तमान में इस परियोजना के लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं, लेकिन यह राशि विशाल स्तर की इस जल प्रबंधन परियोजना के लिए बहुत कम है। किसान नेताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को आगामी विधानसभा सत्र के दौरान इस संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा करनी चाहिए, ताकि सरकार की गंभीरता और परियोजना के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हो सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु के कृषि प्रधान क्षेत्रों में जल संकट एक गंभीर समस्या है। कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ो परियोजना न केवल सिंचाई की सुविधा बढ़ा सकती है, बल्कि यह भविष्य में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच भी प्रदान कर सकती है। यदि पर्याप्त धन की कमी रहती है, तो यह परियोजना केवल कागजों तक सीमित रह सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

नदी जोड़ने की परियोजनाएं केवल इंजीनियरिंग का कार्य नहीं हैं, बल्कि ये कृषि स्थिरता और ग्रामीण जीवन रेखा को बनाए रखने के लिए आवश्यक वित्तीय निवेश हैं।

बैठक के दौरान, किसानों ने जिले में 'कारुवेलम' (Prosopis juliflora) पेड़ों को काटने में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कलेक्टर प्रभाकरन ने बताया कि कार्य प्रगति पर है और लगभग 50% काम पूरा हो चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पेड़ों की कटाई पूरी होते ही जलाशयों की गाद निकालने (desilting) का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा मुआवजे से जुड़ा था। कलेक्टर ने जानकारी दी कि 3,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि के नुकसान का सामना करने वाले किसानों के लिए सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया लंबित है। जैसे ही फंड प्राप्त होगा, राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, बीमा कंपनियों के साथ लंबित दावों को सुलझाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

किसानों ने एस वी मंगलम टैंक के पास बिजली के खंभों के गलत तरीके से लगाए जाने की शिकायत भी की। उनका डर है कि बांध (bund) के पास खंभे लगाने से जल निकाय की संरचना को खतरा हो सकता है, जिससे टैंक भरने पर बांध टूटने की संभावना बढ़ जाती है। कलेक्टर ने इस मामले की तत्काल जांच करने का वादा किया है।

Did You Know?: कावेरी नदी को दक्षिण भारत की जीवन रेखा माना जाता है, जो लाखों एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पानी प्रदान करती है।

Frequently Asked Questions

1. किसान कितनी राशि की मांग कर रहे हैं?
किसान कावेरी-वैगई-गुंडार परियोजना के लिए ₹2,000 करोड़ की मांग कर रहे हैं।

2. 'कारुवेलम' पेड़ क्या हैं?
ये आक्रामक प्रजाति के पेड़ हैं जो जलाशयों और कृषि भूमि पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे पानी के प्रवाह में बाधा आती है।