केरल के तिरुवनंतपुरम चिड़ियाघर में एक दशक के लंबे इंतजार के बाद ज़ेबरा की वापसी हुई है। गुजरात के वंतारा केंद्र से तीन ज़ेबरा को विशेष एम्बुलेंस के जरिए लाया गया है।

  • गुजरात के वंतारा (Vantara) केंद्र से तीन ज़ेबरा तिरुवनंतपुरम लाए गए।
  • लगभग 10 वर्षों के बाद चिड़ियाघर में ज़ेबरा की वापसी हुई है।
  • आने वाले ज़ेबरा में एक नर और दो मादा शामिल हैं ताकि प्रजनन सुनिश्चित हो सके।
  • चिड़ियाघर वंतारा को बदले में किंग कोबरा और शेर जैसी पूंछ वाले मकाक देगा।

केरल के तिरुवनंतपुरम सिटी ज़ू के लिए यह ओणम का त्यौहार बेहद खास साबित हो रहा है। हाल ही में दो शेर के बच्चों के आगमन के बाद, अब गुरुवार सुबह गुजरात के जामनगर स्थित ग्रीन्स ज़ूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (वंतारा) से तीन ज़ेबरा चिड़ियाघर पहुंचे। यह घटना चिड़ियाघर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि लगभग एक दशक के लंबे अंतराल के बाद ज़ेबरा वापस लौटे हैं।

इन ज़ेबरा में एक नर और दो मादा शामिल हैं। उन्हें एक विशेष पशु एम्बुलेंस के माध्यम से सड़क मार्ग से लाया गया। चिड़ियाघर के अधीक्षक टी.वी. अनिल कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने परस्सला में वंतारा की टीम से मुलाकात की और पुलिस सुरक्षा के बीच इन जानवरों को सुरक्षित रूप से चिड़ियाघर पहुंचाया।

प्रजनन और स्थिरता के लिए रणनीतिक निर्णय

शुरुआत में केवल एक जोड़े को लाने की योजना थी, लेकिन चिड़ियाघर के विशेषज्ञों ने अंतिम समय में एक अतिरिक्त मादा ज़ेबरा लाने का निर्णय लिया। चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा सर्जन निकीश किरण ने बताया कि एक स्थायी आबादी के लिए दो नर और तीन मादाओं का अनुपात आदर्श होता है। इससे आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) बनी रहती है और भविष्य में प्राकृतिक प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ 22 ज़ेबरा थे, और वे नहीं चाहते थे कि फिर से एक दशक तक यहाँ ज़ेबरा की कमी रहे।

एक स्थायी झुंड बनाने के लिए आनुवंशिक विविधता और सही लिंग अनुपात बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल जानवरों का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण और संस्थानों के बीच 'एनिमल एक्सचेंज' कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है। जब चिड़ियाघर सीधे जानवर नहीं खरीद सकते, तो इस तरह के सहयोग प्रजातियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वर्तमान में, इन ज़ेबरा को अस्थायी रूप से पुराने जिराफ बाड़े में रखा गया है क्योंकि उनका अपना विशेष बाड़ा अभी तैयार किया जा रहा है। चूंकि ये जानवर इंसानों के बीच रहने के अभ्यस्त नहीं हैं, इसलिए वे शुरुआत में काफी घबराए हुए थे। डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर कड़ी नजर रख रही है ताकि यात्रा के तनाव के कारण उन्हें कोई संक्रमण या 'कैप्चर मायोपैथी' जैसी समस्या न हो।

Did You Know?: ज़ेबरा को हरे घास की तुलना में सूखी घास (hay) खाना अधिक पसंद होता है और वे खनिज के लिए नमक के ब्लॉक का उपयोग करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. ये ज़ेबरा कहाँ से लाए गए हैं?
ये ज़ेबरा गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा (Vantara) केंद्र से लाए गए हैं।

2. चिड़ियाघर ने बदले में क्या दिया है?
तिरुवनंतपुरम चिड़ियाघर वंतारा को एक किंग कोबरा और एक शेर जैसी पूंछ वाला मकाक (lion-tailed macaque) प्रदान कर रहा है।