जस्टिस बी.वी. नगरथ्ना ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि 'उद्योग' की व्यापक परिभाषा को खत्म करने से कॉर्पोरेट जगत की शक्ति बढ़ेगी और श्रमिकों के अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।

  • जस्टिस नगरथ्ना ने 1978 के ऐतिहासिक बेंगलुरु वाटर सप्लाई मामले के फैसले को बदलने पर असहमति जताई।
  • उन्होंने चेतावनी दी कि 'उद्योग' की संकुचित परिभाषा कॉर्पोरेट और श्रमिकों के बीच शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकती है।
  • नए औद्योगिक संबंध कोड (IRC) 2020 के तहत भविष्य में कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की पीठ के फैसले पर अपनी 147 पन्नों की विस्तृत असहमति (dissent) में, जस्टिस बी.वी. नगरथ्ना ने एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने तर्क दिया कि 1978 के ऐतिहासिक फैसले में 'उद्योग' की जो व्यापक परिभाषा दी गई थी, उसे हटाना श्रमिकों के लिए सुरक्षा कवच को नष्ट करने जैसा होगा।

जस्टिस नगरथ्ना के अनुसार, 1978 का बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा मामला दशकों तक श्रम अधिकारों के संरक्षण में एक 'ढाल' के रूप में कार्य करता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि निजीकरण और वैश्वीकरण के दौर में, यह परिभाषा सुनिश्चित करती थी कि राज्य अपने कल्याणकारी दायित्वों से पीछे न हटे और कॉर्पोरेट जगत का श्रमिकों पर अत्यधिक दबाव न बढ़े।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी बदलाव केवल एक परिभाषा का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत के श्रम बाजार के भविष्य को निर्धारित करेगा। यदि 'उद्योग' शब्द का दायरा छोटा होता है, तो लाखों कामगार कानूनी सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी (collective bargaining) के अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।

'उद्योग' की संकुचित व्याख्या कॉर्पोरेट जगत को श्रमिकों पर अनुचित शक्ति का उपयोग करने का अवसर दे सकती है।

न्यायाधीश ने 1880 के एक अंग्रेजी मामले, Greaves v. Tofield का संदर्भ देते हुए तर्क दिया कि जब एक नया कानून (IRC 2020) पुराने कानून (Industrial Disputes Act 1947) की जगह लेता है, तो पुराने कानूनों पर किए गए न्यायिक निर्णय नए कानून पर भी लागू होने चाहिए, यदि उनका उद्देश्य समान है।

जस्टिस नगरथ्ना ने इस बात पर जोर दिया कि नौ न्यायाधीशों की बहुमत वाली पीठ ने 1978 के फैसले को भविष्य के संदर्भों के लिए अप्रासंगिक मानकर एक बड़ी कानूनी चूक की है। उनका मानना है कि नए औद्योगिक संबंध कोड के तहत आने वाले विवादों में यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

Did You Know?: 1978 का बेंगलुरु वाटर सप्लाई मामला भारत में श्रम कानून के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक माना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. जस्टिस नगरथ्ना की मुख्य चिंता क्या है?
उनकी मुख्य चिंता यह है कि 'उद्योग' की परिभाषा बदलने से कॉर्पोरेट कंपनियों की शक्ति बढ़ेगी और श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करने वाला कानून कमजोर होगा।

2. 1978 का फैसला क्यों महत्वपूर्ण था?
यह फैसला 'उद्योग' को बहुत व्यापक रूप से परिभाषित करता था, जिससे अधिक से अधिक कामगारों को श्रम कानूनों के तहत सुरक्षा मिल पाती थी।