चेन्नई नगर निगम (GCC) के विभिन्न नागरिक कार्यों की खराब गुणवत्ता को लेकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (PMCs) की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।

  • चेन्नई नगर निगम (GCC) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • पार्षदों का आरोप है कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (PMCs) बुनियादी ढांचे की जांच ठीक से नहीं कर रहे हैं।
  • कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि ADB और KfW जैसे अंतरराष्ट्रीय फंडों के लिए PMCs अनिवार्य हैं।
  • भ्रष्टाचार के आरोपों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

चेन्नई नगर निगम (GCC) की हालिया परिषद बैठक में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (PMCs) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। परिषद के सदस्यों ने आरोप लगाया कि निगम द्वारा कराए जा रहे नागरिक कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे जनता के पैसे और बुनियादी ढांचे का नुकसान हो रहा है।

पार्षदों के गंभीर आरोप और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा

DMK पार्षद C. वेलु और डिप्टी मेयर M. मगेश कुमार ने बैठक के दौरान चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई वार्डों में फुटपाथ और अन्य निर्माण कार्य पूरे होने के मात्र छह से सात महीनों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर PMCs पर लापरवाही का आरोप लगाया कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निरीक्षण नहीं कर रहे हैं।

मेयर R. प्रिया ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि PMCs को अच्छे इरादे से नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका कार्यान्वयन सही ढंग से नहीं हुआ है। उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच के लिए डिप्लोमा छात्रों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि GCC के अपने इंजीनियरिंग कर्मचारी इस कार्य को अधिक कुशलता से कर सकते थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में तीसरे पक्ष के परामर्शदाताओं (PMCs) पर अत्यधिक निर्भरता जवाबदेही के संकट को जन्म दे सकती है। यदि निगरानी एजेंसियां ही विफल हो जाती हैं, तो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और घटिया निर्माण एक गंभीर संकट बन जाता है।

यदि परामर्शदाताओं और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

GCC कमिश्नर G.S. समीरन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक (ADB) और KfW जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से प्राप्त परियोजनाओं के लिए PMCs की नियुक्ति फंडिंग की शर्तों का एक अनिवार्य हिस्सा है। हालांकि, डिप्टी मेयर ने सुझाव दिया कि निगम के अपने पूंजीगत कोष से किए जाने वाले कार्यों के लिए इन बाहरी सलाहकारों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

कार्य समिति के अध्यक्ष N. चित्ररासु ने परामर्शदाताओं और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की आशंका जताई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कानूनी मामला दर्ज किया जाएगा।

Did You Know?: अंतरराष्ट्रीय विकास बैंक जैसे ADB अक्सर बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तीसरे पक्ष के ऑडिट और परामर्श अनिवार्य करते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चेन्नई नगर निगम में PMCs की भूमिका क्या है?
उत्तर: PMCs का काम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की निगरानी करना है, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय फंड से जुड़ी परियोजनाओं में।

प्रश्न 2: पार्षदों की मुख्य शिकायत क्या है?
उत्तर: पार्षदों का कहना है कि निर्माण कार्य बहुत जल्दी खराब हो रहे हैं, जो PMCs की निगरानी में विफलता को दर्शाता है।