कोच्चि में एकीकृत शहरी पुनरुद्धार और जल परिवहन प्रणाली (IURWTS) के तहत प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति के दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है। टीम ने शहर की अत्यधिक प्रदूषित नहरों और अपर्याप्त सीवेज प्रबंधन वाले क्षेत्रों का दौरा किया।
मुख्य बातें
- केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने कोच्चि में प्रस्तावित एसटीपी स्थलों का दौरा किया।
- शहर की नहरें अत्यधिक प्रदूषण और दुर्गंध से जूझ रही हैं, जिससे स्थानीय जीवन प्रभावित हो रहा है।
- परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,386 करोड़ से बढ़कर अब ₹1,700 करोड़ हो गई है।
- परियोजना के तहत एलमकुलम और मुत्तार में दो बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
कोच्चि के शहरी बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए प्रस्तावित एकीकृत शहरी पुनरुद्धार और जल परिवहन प्रणाली (IURWTS) परियोजना को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की संभावना है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों की एक पांच सदस्यीय टीम ने प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के स्थलों और भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तृत निरीक्षण किया।
केरल जल प्राधिकरण (KWA) के सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि शहर की सभी नहरें अत्यधिक प्रदूषित हैं। नहरों का पानी काला पड़ चुका है और वहां से निकलने वाली दुर्गंध ने स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे के लिए भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन नहीं बिछाई जाती, तब तक नहरों की सफाई करना असंभव होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कोच्चि का जल प्रबंधन संकट अब एक गंभीर मोड़ पर है। पैनमपल्ली नगर जैसे क्षेत्रों में, सेप्टिक टैंकों का ओवरफ्लो सीधे नहरों में मिल रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। ज्वारीय बदलावों के कारण नहरों का गंदा पानी घरों में वापस घुस रहा है, जो एक बड़ी चुनौती है।
'बिना भूमिगत सीवरेज प्रणाली के, कोच्चि की नहरों को स्वच्छ और नौकायन योग्य बनाना एक सपना ही रहेगा।'
यह परियोजना कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा प्रबंधित की जा रही है। इसमें दो मुख्य एसटीपी शामिल हैं: पहला एलमकुलम में (55 MLD क्षमता) और दूसरा मुत्तार में (50 MLD क्षमता)। यह योजना कोच्चि कॉर्पोरेशन के साथ-साथ कलामसेरी, त्रिपुनिथुरा और त्रिककारा नगर पालिकाओं को भी लाभान्वित करेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोच्चि लंबे समय से जल प्रदूषण और खराब जल निकासी व्यवस्था से जूझ रहा है। शहरीकरण के बढ़ते दबाव के कारण पुराने सेप्टिक टैंक प्रणालियाँ अब पर्याप्त नहीं हैं, जिसके कारण जल निकायों में सीवेज का रिसाव बढ़ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. यह परियोजना किन शहरों को कवर करेगी?
यह परियोजना कोच्चि कॉर्पोरेशन के साथ-साथ कलामसेरी, त्रिपुनिथुरा और त्रिककारा नगर पालिकाओं को भी सेवा प्रदान करेगी।
2. परियोजना का वित्तपोषण कैसे किया जाएगा?
यह एक संयुक्त वित्तपोषित परियोजना है जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार (KIIFB के माध्यम से) दोनों योगदान देंगे।