इरोड के वेन्डिपालयम में कचरे के ढेर से निकलने वाले जहरीले तरल (leachate) के कारण भूजल दूषित होने की खबरें आई हैं। स्थानीय निवासियों ने पानी के पीले होने और बदबू आने की शिकायत करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

मुख्य बातें

  • वेन्डिपालयम डंप यार्ड के पास भूजल का रंग पीला हो गया है।
  • स्थानीय निवासियों ने कचरे से निकलने वाले लीचेट (leachate) से प्रदूषण का आरोप लगाया है।
  • नगर निगम ने 'जीरो-डंपिंग' नीति और बायो-सीएनजी प्लांट की योजना का आश्वासन दिया है।

तमिलनाडु के इरोड में वेन्डिपालयम डंप यार्ड के आसपास रहने वाले निवासियों ने एक गंभीर पर्यावरणीय संकट की चेतावनी दी है। वार्ड 60 के स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के ठोस अपशिष्ट डंप यार्ड से निकलने वाला जहरीला तरल (leachate) जमीन के अंदर रिस रहा है, जिससे आसपास का भूजल अत्यधिक प्रदूषित हो गया है।

निवासियों के अनुसार, बोरवेल का पानी अब न केवल पीला पड़ गया है, बल्कि उससे असहनीय बदबू भी आ रही है, जिससे यह घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गया है। यह डंप यार्ड पिछले छह दशकों से आवासीय क्षेत्रों के बीच ही काम कर रहा है, जिसे स्थानांतरित करने की मांग वर्षों से की जा रही है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरीकरण और अपशिष्ट प्रबंधन की विफलता सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालती है। यदि लीचेट का रिसाव अनियंत्रित रहता है, तो यह न केवल स्थानीय जल स्तर को बल्कि पास से गुजरने वाली नदियों और नहरों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है।

कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

इरोड नगर निगम प्रतिदिन लगभग 250 टन ठोस कचरा उत्पन्न करता है। हालांकि जैविक कचरे का प्रसंस्करण किया जाता है, लेकिन लगभग 100 टन सूखा कचरा प्रतिदिन वेन्डिपालयम डंप यार्ड में भेजा जाता है। डंप यार्ड में जमा कचरे का अनुमानित भार 2 लाख टन से अधिक बताया जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वेन्डिपालयम डंप यार्ड का उपयोग दशकों से किया जा रहा है। 2021 में, अधिकारियों ने लगभग 4.45 लाख क्यूबिक मीटर पुराने कचरे का 'बायो-माइनिंग' (bio-mining) कार्य पूरा किया था, लेकिन उसके बाद से भी सूखे कचरे का जमाव जारी है, जिससे प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: लीचेट एक अत्यधिक विषाक्त तरल है जो कचरे के ढेर से रिसता है और इसमें भारी धातुएं एवं हानिकारक रसायन हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पानी के पीले होने का मुख्य कारण क्या हो सकता है?
उत्तर: स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह डंप यार्ड से निकलने वाले लीचेट का परिणाम है, हालांकि कुछ लोग इसे औद्योगिक प्रदूषण भी मानते हैं।

प्रश्न 2: नगर निगम इस समस्या का समाधान कैसे कर रहा है?
उत्तर: निगम 'जीरो-डंपिंग' नीति पर काम कर रहा है और कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है।