ग्रीनलैंड के पेटरमैन ग्लेशियर से एक विशाल हिमखंड अलग हुआ है, जिसका आकार न्यूयॉर्क के मैनहट्टन द्वीप के बराबर है। यह 2020 के बाद आर्कटिक क्षेत्र में देखी गई सबसे बड़ी बर्फ टूटने की घटनाओं में से एक है।
- पेटरमैन ग्लेशियर से मैनहट्टन के आकार का एक विशाल हिमखंड अलग हुआ है।
- यह 2020 के बाद आर्कटिक में हुई सबसे बड़ी 'काल्विंग' (बर्फ टूटने) की घटनाओं में से एक है।
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-1 उपग्रह ने इस घटना के साक्ष्य जुटाए हैं।
आर्कटिक क्षेत्र से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। ग्रीनलैंड के पेटरमैन ग्लेशियर से एक विशाल हिमखंड अलग हो गया है, जिसका आकार न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन द्वीप के लगभग बराबर बताया जा रहा है। यह घटना न केवल वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों की ओर भी इशारा कर रही है।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सेंटिनल-1 (Sentinel-1) उपग्रह द्वारा प्राप्त इंटरफेरोमेट्री डेटा से इस घटना की पुष्टि हुई है। उपग्रह की तस्वीरों में ग्लेशियर की बर्फ की जीभ (ice tongue) में गहरे फ्रैक्चर और दरारें देखी गई हैं, जो इस विशाल हिमखंड के अलग होने का संकेत देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2020 के बाद आर्कटिक में देखी गई सबसे बड़ी 'काल्विंग' घटनाओं में से एक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की बड़ी बर्फ टूटने की घटनाएं समुद्र के स्तर में वृद्धि का सीधा संकेत हैं। जब ग्लेशियरों से इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ अलग होकर समुद्र में मिलती है, तो यह वैश्विक समुद्री जल स्तर को अस्थिर कर सकती है। पेटरमैन ग्लेशियर जैसे महत्वपूर्ण ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
ग्लेशियरों का यह तेजी से टूटना वैश्विक तापन (Global Warming) के कारण समुद्र और बर्फ के बीच बदलते संतुलन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
ऐतिहासिक रूप से, पेटरमैन ग्लेशियर अपनी अस्थिरता के लिए जाना जाता रहा है। पिछले कुछ दशकों में, बढ़ते समुद्री तापमान ने इस ग्लेशियर के निचले हिस्सों को कमजोर कर दिया है, जिससे बर्फ का गिरना अब एक नियमित प्रक्रिया बनती जा रही है।
Frequently Asked Questions
1. यह घटना कितनी बड़ी है?
इस हिमखंड का आकार न्यूयॉर्क के मैनहट्टन द्वीप के समान है, जो इसे अत्यंत विशाल बनाता है।
2. वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि कैसे की?
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-1 उपग्रह ने बर्फ में दरारें और ग्लेशियर के टूटने के सटीक डेटा को कैप्चर किया है।